ममता बनर्जी के पास बागी गुट ने फेंका पासा, अगर ऐसा किया तो आ जाएंगे वापस

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
Follow us on Google News
share

घोष ने कहा कि पार्टी के कई नेताओं से बात करने के बाद मुझे जो समझ आया है, वह यह है कि ममता बनर्जी को अभिषेक को सक्रिय राजनीति से दूर करना होगा, कम से कम कुछ समय के लिए। मेरा मानना ​​है कि इससे नाराज नेता और कार्यकर्ता उनके पास वापस आ जाएंगे।

ममता बनर्जी के पास बागी गुट ने फेंका पासा, अगर ऐसा किया तो आ जाएंगे वापस

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व मंत्री और बागी गुट के रवींद्रनाथ घोष ने रविवार को दावा किया कि अगर ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को सक्रिय राजनीति से अलग करने में सफल हो जाती हैं, तो ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल अधिकांश असंतुष्ट नेता टीएमसी में लौट आएंगे। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट में शामिल होने वाले घोष नवीनतम सदस्य हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी के गुट से अपने संबंध तोड़ लिए। इससे कूचबिहार में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव आया है और मुश्किलों से घिरी पार्टी में मतभेद और गहरे हो गए हैं।

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब बागी गुट ने पार्टी पर कब्जा करने की कोशिशें तेज कर दी हैं और अपनी समानांतर राज्य और जिला समितियां बनाई हैं। इस कदम से ममता बनर्जी के कई पुराने वफादार, जिनमें बीरभूम के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल भी शामिल हैं, उनके खेमे में आ गए हैं, जो राजनीतिक बगावत से संगठन बनाने की दिशा में एक निर्णायक बदलाव है। बागी गुट द्वारा घोष को पार्टी का कूचबिहार जिला अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना है। उन्होंने अभिषेक बनर्जी और राजनीतिक परामर्श कंपनी आई-पैक की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को जो हार मिली, वह काफी हद तक इन्हीं के प्रभाव का नतीजा थी।

'अभिषेक बनर्जी को दूर करने से वापस आ जाएंगे नेता'

घोष ने संवाददाताओं से कहा, "पार्टी के कई नेताओं से बात करने के बाद मुझे जो समझ आया है, वह यह है कि ममता बनर्जी को अभिषेक को सक्रिय राजनीति से दूर करना होगा, कम से कम कुछ समय के लिए। मेरा मानना ​​है कि इससे नाराज नेता और कार्यकर्ता उनके पास वापस आ जाएंगे।" उन्होंने कहा, “इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अभिषेक की मनमानी... 80 से अधिक मौजूदा विधायकों और मंत्रियों के टिकट काट दिए गए तथा कई अन्य नेताओं को संगठनात्मक पदों से हटा दिया गया, इसका पार्टी पर गंभीर असर पड़ा।”

'ममता दीदी से ताकत कहीं और सिमट गई'

दो दशक से ज्यादा समय तक तृणमूल के जिला अध्यक्ष रहे और ममता बनर्जी के लंबे समय से सहयोगी रहे घोष ने सवाल उठाया कि क्या पार्टी प्रमुख का पार्टी पर असरदार नियंत्रण बना हुआ है। उन्होंने दावा किया, "क्या सच में अब दीदी के हाथों में कोई ताकत बची है? ताकत कहीं और सिमट गई है और अहम जिम्मेदारियां नाकाबिल लोगों को सौंप दी गई हैं। अगर ममता बनर्जी चाहें भी तो भी वे कोई काम नहीं कर पाएंगी।"

'अभिषेक बनर्जी में राजनीतिक अनुभव की कमी'

जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी का बंटवारा और चुनावी हार अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व का नतीजा थी, तो घोष ने कहा, "उनमें राजनीतिक अनुभव की कमी है। वे किसी राजनीतिक आंदोलन से नहीं आए हैं। और आई-पैक क्या थी? यह युवाओं का एक समूह है जो हमें बताता है कि क्या करना है।" घोष ने कहा, "हम राजनीतिक संघर्षों और सालों की कड़ी मेहनत से आगे बढ़े हैं। 2011 या 2016 में आई-पैक नहीं थी। अचानक वह अपरिहार्य हो गयी। आखिर में, उन्होंने पार्टी को बर्बाद कर दिया और चले गए।" ममता बनर्जी से सीधे अपनी चिंताएं बताने के बजाय पाला बदलने के सवाल पर घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक ही है और उसमें कोई गुट नहीं हैं। उन्होंने कहा, "हमें वहां रहना होगा जहां बहुमत है। उत्तर बंगाल के सभी विधायक और नेता एक जगह इकट्ठा हो गए हैं। मैंने पार्टी कार्यकर्ताओं का साथ देने के लिए यह फैसला लिया है।"

इस खबर पर आपकी क्या राय है?

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
परिचय, अनुभव एवं शिक्षा
वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।

यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

मीडिया में अवॉर्ड्स.
मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत एक दर्जन से ज्यादा पुरस्कार जीते हैं।

विशेषज्ञता
देश-विदेश की राजनीति पर गहरी पकड़
यूपी-बिहार समेत सभी राज्यों की खबरों को कवर करने का व्यापक अनुभव
विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव, संसद की कार्यवाही को लंबे समय से कवर किया
ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज, एनालिसिस स्टोरीज, एशिया, मिडिल ईस्ट, पश्चिमी देशों की खबरों को कवर करने का एक दशक से ज्यादा का एक्सपीरियंस

और पढ़ें