Explainer: CM विजय को समर्थन देने वाले बागी AIADMK विधायकों पर लटकी तलवार, अब क्या ऑप्शन? समझिए पूरा गणित

Upendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान सीएम विजय को समर्थन देने वाले AIADMK विधायकों पर तलवार लटक गई है। पार्टी महासचिव पलानीस्वामी ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दिया है। अब उनके अयोग्य घोषित होने का खतरा बढ़ गया है।

CM विजय को समर्थन देने वाले बागी AIADMK विधायकों पर लटकी तलवार, अब क्या ऑप्शन? समझिए पूरा गणित

Vijay Thalapathy: तमिलनाडु विधानसभा में थलापति विजय की सरकार को फ्लोर टेस्ट को AIADMK के 25 बागी विधायकों का साथ मिला है। विजय को फ्लोर टेस्ट पार कर गए, लेकिन इन बागी विधायकों के ऊपर अब तलवार लटक गई है। फ्लोर टेस्ट खत्म होने के बाद सीवी शनमुगम, एसपी वेलुमणि के नेतृत्व में एआईडीएमके विधायकों ने खुले आम पार्टी नेतृत्व के ऊपर हमला करना शुरू कर दिया। शाम होते-होते पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने इन विधायकों को पार्टी के तमाम पदों से हटा दिया। हालांकि, अभी तक इन विधायकों के ऊपर इसके अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

बागी विधायकों का आरोप है कि पलानीस्वामी ने डीएमके के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश की थी। इसलिए वह अपने वैचारिक साथी विजय की सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। इन आरोपों को पलानीस्वामी ने सिरे से खारिज कर दिया है। अब विधायक भले ही कुछ भी कहें, लेकिन उनके ऊपर अयोग्य साबित होने की तलवार लटक गई है। संविधान के अनुसार देखा जाए, तो अब इन विधायकों के बाद केवल पांच रास्ते हैं। तो चलिए जानते हैं...

1. 32 का आंकड़ा जुटाने की कोशिश

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK को कुल 47 सीटों पर जीत मिली थी। ऐसे में 25 विधायकों के बागी हो जाने के बाद पलानीस्वामी के पक्ष में करीब 22 विधायकों का समर्थन है। अगर बागी विधायक पलानी स्वामी से 7 विधायकों को अपनी तरफ करने में सफल हो जाते हैं। तो वह पूरी पार्टी के ऊपर ही दावा ठोक सकते हैं या फिर बिना अयोग्य घोषित हुए किसी दूसरी पार्टी में विलय हो सकते हैं। हालांकि इसकी संभावना कम है, लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है।

2. अयोग्यता की तलवार

बागी विधायकों की वर्तमान स्थिति के हिसाब से उनका अयोग्य घोषित होना तय माना जा रहा है। दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए इनको 7 और विधायकों की जरूरत है, अगर वह ऐसा कर पाने में असमर्थ होते हैं। तो पलानीस्वामी स्पीकर से शिकायत कर इन विधायकों को अयोग्य घोषित करवा सकते हैं। हालांकि, इस मामले में स्पीकर के पास अंतिम अधिकार होगा। अयोग्य घोषित होने की स्थिति में इन सभी सीटों पर उपचुनाव होगा।

3.मध्य प्रदेश की तरफ इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने की स्थिति

मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए विधायकों ने भी अयोग्य घोषित होने से पहले इस्तीफा देने की पेशकश की थी। इसके बाद उन सीटों पर चुनाव हुए थे। एआईडीएमके से बागी हुए विधायक भी कुछ इसी तरह की रणनीति का पालन कर सकते हैं। विधायक इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो सकते हैं, जिसके बाद उन्हें सरकार के समर्थन से चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा।

4. पार्टी से लड़कर सरकार को बाहर से समर्थन

आप सांसद स्वाति मालीवाल काफी समय तक अपनी पार्टी के खिलाफ बोलती हुईं राज्यसभा की सदस्या बनी रही थीं। अगर पलानीस्वामी स्पीकर से शिकायत नहीं करते हैं और बागी विधायकों के साथ उनका किसी भी तरह का सामंजस्य बना रहता है, तो यह विधायक बाहर से पार्टी को समर्थन देकर एआईएडीएमके में बने रह सकते हैं और इसी तरह के काम कर करते रह सकते हैं। हालांकि, जिस तरीके की बयानबाजी हो रही है। इसकी संभावना कम है।

5. लंबी कानूनी लड़ाई

एआईएडीएमके से बागी हो चुके इन विधायकों को अगर अयोग्य ठहराया जाता है, तो अंतिम विकल्प कोर्ट में जाने का होगा। अगर यह लड़ाई कानूनी होती है, तो इसका बड़ा नुकसान इन विधायकों को ही होगा। क्योंकि पार्टी को संविधान की दसवीं अनुसूची का दल-बदल विरोधी कानून एक सुरक्षा ढांचा प्रदान करती है। ऐसे में फैसला विधायकों के खिलाफ जाने की प्रबल संभावना है।

पार्टी से बागी होकर टीवीके के पास पहुंचे बागी विधायकों के लिए रास्ते तो कई है, लेकिन क्या वह सही है। इसका फैसला आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में एक फिल्म अभिनेता के आने के बाद से ड्रामा लगातार बना हुआ है। विजय की सरकार स्थिर है, लेकिन यह कब तक स्थिर रहती है यह देखना होगा। क्योंकि गठबंधन सहयोगी लगातार विजय के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। इसी वजह से शपथ लेने के दूसरे ही दिन विजय को अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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