फिर टूटेगी कांग्रेस? राज्यसभा चुनाव में राहुल गांधी की करीबी के नाम पर भड़के नेता, बीजेपी तैयार!

लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल
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Rajya Sabha Polls Cross Voting: राज्यसभा चुनाव से पहले मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने पर कांग्रेस में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। विधायकों की संख्या होने के बावजूद पार्टी को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है।

फिर टूटेगी कांग्रेस? राज्यसभा चुनाव में राहुल गांधी की करीबी के नाम पर भड़के नेता, बीजेपी तैयार!

Rajya Sabha Polls Cross Voting: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है, लेकिन असल पेंच क्रॉस वोटिंग के डर को लेकर फंसता दिख रहा है। बीजेपी नेताओं द्वारा तीसरे उम्मीदवार को उतारने के इशारों और कांग्रेस के भीतर अपनी ही उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को लेकर उठ रहे विरोध के सुरों ने मुख्य विपक्षी दल की चिंता बढ़ा दी है। इसी बेचैनी के चलते कांग्रेस ने आनन-फानन में अपने विधायकों की बैठक भी बुलाई है।

किन सीटों पर हो रहा है चुनाव?

मध्य प्रदेश से राज्यसभा की जो तीन सीटें खाली हो रही हैं, वे वर्तमान में केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन, बीजेपी सांसद सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के पास हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह एक और कार्यकाल की 'तलाश' में नहीं हैं। 18 जून को इन सीटों के लिए मतदान होना है।

क्या है विधानसभा का नंबर गेम?

मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को 58 प्रथम वरीयता वाले वोटों की जरूरत है। सत्ताधारी बीजेपी के पास वर्तमान में 164 विधायक हैं। अपनी दो सीटें सुरक्षित करने के लिए पार्टी को 116 (58x2) वोटों की जरूरत है। इसके बाद भी बीजेपी के पास 48 वोट बचेंगे। यानी अगर पार्टी तीसरे उम्मीदवार को उतारती है, तो उसे केवल 10 अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी। बीजेपी ने अपने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है।

कांग्रेस की स्थिति क्या है?

कांग्रेस के पास वैसे तो 64 विधायक हैं, लेकिन विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा को चुनाव हलफनामे के मामले में हाई कोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव में वोट डालने से रोक दिया है। वहीं, बीना से विधायक निर्मला सप्रे लोकसभा चुनाव से पहले अनौपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गई थीं और उन पर अयोग्यता की कार्यवाही चल रही है। इसके अलावा दतिया के राजेंद्र भारती को पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है। ऐसे में कांग्रेस के पास 62 वैध वोट बचे हैं। आंकड़े के लिहाज से कांग्रेस एक सीट आसानी से जीत सकती है, लेकिन बगावत के चलते क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा है। एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है।

मीनाक्षी नटराजन के नाम पर क्यों उठ रहे सवाल?

कांग्रेस ने पूर्व लोकसभा सांसद और राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है, लेकिन इस फैसले से पार्टी में असंतोष दिखने लगा है। नेताओं का तर्क है कि 2014 में मंदसौर लोकसभा सीट हारने के बाद से नटराजन का विधायकों और स्थानीय नेताओं के साथ 'सक्रिय संपर्क' नहीं रहा है।

भोपाल के कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने 'एक्स' पर लिखा कि पार्टी ने उम्मीदवार चयन में बड़ी 'गलती' की है। राहुल और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए उन्होंने लिखा कि राज्य में क्रॉस वोटिंग का जोखिम है; अगर दिग्विजय सिंह को ही दोबारा मौका दिया जाता, तो सीट सुरक्षित रहती। उन्होंने यह भी कहा कि 2028 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए ऐसे नेता को चुनना चाहिए था जिसकी जमीन पर मजबूत पकड़ हो।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के एक कांग्रेस विधायक ने भी नाम न छापने की शर्त पर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि मीनाक्षी नटराजन वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन उनका राज्य के नेताओं से संपर्क टूट गया है। जब विधायकों को लगता है कि वे किसी वरिष्ठ नेता से सीधे संपर्क नहीं कर सकते, तो बेचैनी बढ़ती है और क्रॉस वोटिंग की आशंका पैदा होती है।"

बीजेपी ले रही मजे, तीसरे उम्मीदवार का दिया हिंट

कांग्रेस के भीतर मची इस खींचतान का बीजेपी पूरा फायदा उठा रही है। बीजेपी उम्मीदवार तरुण चुघ ने हालांकि कहा कि तीसरे उम्मीदवार का फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा, लेकिन राज्य के नेताओं ने इसके साफ संकेत दे दिए हैं। वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "अगर पार्टी तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारती है, तो हम उसकी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।"

वहीं, प्रदेश बीजेपी मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कांग्रेस नेता ज्ञानचंदानी के पोस्ट को शेयर करते हुए करारा तंज कसा। उन्होंने कहा, "क्रॉस वोटिंग अब सिर्फ एक चिंता नहीं है, इसके स्पष्ट संकेत दिखने लगे हैं। कांग्रेस में अंदरूनी विरोध खुलकर सामने आ गया है। जब विरोधी नहीं बल्कि अपने ही पार्टी के फैसलों पर सवाल उठाने लगें, तो हार के संकेत खुद-ब-खुद दिखने लगते हैं।"

पहले भी टूट चुकी है कांग्रेस: आखिर क्यों सता रहा है क्रॉस वोटिंग का डर?

मध्य प्रदेश की राजनीति को करीब से जानने वालों के लिए राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस में 'टूट' या 'बगावत' कोई नई बात नहीं है। राज्य में राज्यसभा चुनाव और कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग या बगावत का एक पुराना और कड़वा नाता रहा है।

2020 का वो राज्यसभा चुनाव, जब कांग्रेस के हाथ से फिसल गई थी सत्ता

मध्य प्रदेश के इतिहास में जब भी राज्यसभा चुनाव और कांग्रेस की बगावत का जिक्र होता है, तो मार्च 2020 का घटनाक्रम सबसे ऊपर आता है। उस वक्त भी राज्यसभा के चुनाव सिर पर थे और क्रॉस वोटिंग का भारी डर था, लेकिन जो हुआ उसने पूरे देश की राजनीति में भूचाल ला दिया।

राज्यसभा टिकट की रेस और पार्टी नेतृत्व से नाराजगी के चलते कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 10 मार्च 2020 को अचानक पार्टी से इस्तीफा दे दिया। सिंधिया के साथ उनके समर्थक 22 कांग्रेस विधायकों ने भी बगावत कर दी और इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए।

गिर गई थी कमलनाथ सरकार

इस ऐतिहासिक बगावत का नतीजा यह हुआ कि 15 महीने पुरानी कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिर गई और 23 मार्च 2020 को शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। इसके बाद जून 2020 में हुए राज्यसभा चुनाव में सिंधिया बीजेपी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे।

राष्ट्रपति चुनाव और हालिया दलबदल ने भी दिए हैं कांग्रेस को जख्म

कांग्रेस के लिए क्रॉस वोटिंग का खौफ सिर्फ 2020 तक सीमित नहीं है। पार्टी को अपने ही विधायकों से कई बार झटके मिले हैं। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी मध्य प्रदेश कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग देखने को मिली थी, जब कई विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया था।

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Amit Kumar

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