शरद पवार को राज्यसभा भेजने के खिलाफ क्यों थे उद्धव ठाकरे, सता रहा है एक डर

Mar 10, 2026 09:33 am ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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शिवसेना यूबीटी के एक नेता ने अखबार को बताया, 'सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल बीते मंगलवार को उद्धव ठाकरे से मिलने के लिए आए थे। दो घंटे की चर्चा के बाद भी वो उद्धव को पवार की उम्मीदवारी के लिए नहीं मना सके।

शरद पवार को राज्यसभा भेजने के खिलाफ क्यों थे उद्धव ठाकरे, सता रहा है एक डर

राज्यसभा में शरद पवार का चुना जाना महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा विवाद को जन्म देता नजर आ रहा है। खबर है कि उनके निर्वाचन से शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) खुश नहीं है। इतना ही नहीं कहा जा रहा है कि ठाकरे परिवार ने पहले ही पवार का समर्थन नहीं करने का फैसला कर लिया था। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इसकी वजह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों में विलय की अटकलें बताई जा रही हैं।

शरद पवार गुट पर उद्धव सेना को भरोसा नहीं

इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में शिवसेना यूबीटी के कई नेताओं ने कहा कि एनसीपी एसपी भरोसेमंद सहयोगी नहीं है। साथ ही कहा कि पार्टी को महाविकास अघाड़ी में भी भरोसा नहीं किया जा सकता।

नहीं माने उद्धव ठाकरे

शिवसेना यूबीटी के एक नेता ने अखबार को बताया, 'सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल बीते मंगलवार को उद्धव ठाकरे से मिलने के लिए आए थे। दो घंटे की चर्चा के बाद भी वो उद्धव को पवार की उम्मीदवारी के लिए नहीं मना सके। उद्धव ने एनसीपी एसपी नेताओं ने कहा कि वह शरद पवार का सम्मान करते हैं, लेकिन शिवसेना यूबीटी उनके उम्मीदवार को राज्यसभा भेजेगी, क्योंकि यह उनकी बारी है।'

एक और नेता ने बताया, 'हमारे नेता आदित्य ठाकरे ने कई मौकों पर कहा कि सिर्फ शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस रही केंद्र में भाजपा सरकार का विरोध कर रहीं हैं और स्थिति स्पष्ट नहीं है कि कौन से दल अब INDIA गुट का हिस्सा हैं। हम कांग्रेस को बता रहे हैं कि ऐसे दल, जो सरकार के साथ शामिल होने के लिए गुप्त बैठकों में शामिल हैं, उन्हें गठबंधन का हिस्सा नहीं बनने देना चाहिए।'

कांग्रेस ने किया समर्थन

खास बात है कि कांग्रेस ने शरद पवार की उम्मीदवारी का समर्थन किया था। खबर है कि लोकसभा सांसद सुले ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की थी।

शिवसेना यूबीटी के एक नेता ने अखबार से कहा, 'तीन पार्टियों के पास किसी एक व्यक्ति को राज्यसभा भेजने के लिए पर्याप्त नंबर थे। शिवसेना यूबीटी को लगा कि जब आदित्य ने सार्वजनिक रूप से कह दिया है कि सिर्फ कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी ही भाजपा सरकार के खिलाफ लड़ रहीं हैं, तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी। हालांकि, एक बार कांग्रेस ने ऐलान किया कि वह पवार का समर्थन करेंगे, तो उसने हमें मुश्किल में डाल दिया। क्योंकि न हम खुद से उम्मीदवार चुन सकते हैं और न ही कांग्रेस से अलग जा सकते हैं।'

ठाकरे परिवार है नाराज

रिपोर्ट के अनुसार, आदित्य ठाकरे की तरफ से दिए गए बयान से संकेत मिल रहे हैं कि ठाकरे परिवार पवार को मिले समर्थन से खासा खुश नहीं है। उन्होंने कहा था, 'मैं यह फिर कहना चाहता हू कि हम हमारे हक के लिए लड़ रहे हैं। दुर्भाग्य से हमें हमारे उम्मीदवार को चुनाव लड़ाने का मौका 2028 तक नहीं मिलेगा।'

ये भी चुने गए

निर्वाचित होने वालों में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े भी शामिल हैं। सात सीटों के लिए केवल सात उम्मीदवार मैदान में होने के कारण किसी प्रकार का मतदान नहीं हुआ। भाजपा ने अठावले और तावड़े के अलावा रामराव वडुकुटे और माया इवनाते को भी उम्मीदवार बनाया था। एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना की प्रवक्ता ज्योति वाघमारे भी राज्यसभा पहुंची हैं। वहीं, भाजपा की सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं।

Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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