स्मृति ईरानी को तो मिली थी छूट... मीनाक्षी नटराजन का RS नामांकन रद्द होने पर भड़का विपक्ष
Meenakshi Natarajan Rajya Sabha nomination: राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की इकलौती उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। विपक्ष ने चुनाव आयोग को स्मृति ईरानी के हलफनामे की याद दिलाई है।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की इकलौती राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन चुनाव आयोग द्वारा खारिज किए जाने के बाद सियासत गरमा गई है। इस फैसले को लेकर मंगलवार को विपक्षी नेताओं ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। जहां कुछ नेताओं ने इसे 'साजिश' और 'सीट चोरी' करार दिया, वहीं शिवसेना (यूबीटी) ने चुनाव आयोग को उन पुराने मामलों की याद दिलाई जब कथित विसंगतियों को नजरअंदाज कर दिया गया था।
नामांकन क्यों हुआ रद्द?
मध्य प्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब उनके नामांकन पत्र को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया। आरोप है कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में साल 2022 में हैदराबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) द्वारा जारी किए गए समन की जानकारी नहीं दी थी। बीजेपी नेता राहुल कोठारी ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद उनके नामांकन का दोबारा मूल्यांकन किया गया और फिर उसे रद्द कर दिया गया।
विपक्ष ने दिलाई स्मृति ईरानी की याद
मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने के बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। शिवसेना यूबीटी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग को पूर्व बीजेपी सांसद स्मृति ईरानी की याद दिलाई। उन्होंने एक्स पर लिखा कि स्मृति ईरानी को उनके हलफनामे में "तीन अलग-अलग शैक्षणिक योग्यताओं" (2004, 2011 और 2014 के हलफनामे) के बावजूद लोकसभा चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई थी। चतुर्वेदी ने तंज कसते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन एक ऐसी शिकायत पर रद्द कर दिया गया जिसमें कोई एफआईआर नहीं थी और उन्हें चुनाव आयोग को अपनी बात समझाने का 'जीरो चांस' दिया गया।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस फैसले को एक "भद्दा मजाक" बताया। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि मोदी-शाह दोनों सदनों को नियंत्रित करने और संविधान में संशोधन करने के लिए कितने बेताब हैं, अन्यथा 2029 में उनका समय समाप्त हो जाएगा।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इसे बीजेपी की साजिश और 'सीट चोरी' का प्रयास बताया। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि लोगों की आवाज़ को दबाया जा रहा है, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए एक काला दिन है।
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने भी इसकी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर खुला हमला बताया और कहा कि पक्षपातपूर्ण हितों के लिए संवैधानिक मानदंडों की बलि नहीं दी जा सकती।
कांग्रेस का पलटवार: 'यह सीट छीनने की कोशिश'
कांग्रेस ने नटराजन के नामांकन में किसी भी तरह की जानकारी छिपाने के दावों को 'बकवास' बताते हुए खारिज कर दिया है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह सिर्फ कांग्रेस की सीट छीनने का एक हताश प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब बीजेपी को लगा कि कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की उनकी गंदी चालें विफल होने वाली हैं, तो वे इस स्तर तक गिर गए। इस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को वेणुगोपाल, जयराम रमेश और सचिन पायलट सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन भी किया।
मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेता कमलनाथ ने पार्टी की सीट छीनने का आरोप लगाते हुए एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि क्रॉस वोटिंग की चिंताओं के बीच बेंगलुरु जा रहे कांग्रेस विधायकों से भरी एक फ्लाइट को लंबे समय तक जानबूझकर टेकऑफ की अनुमति नहीं दी गई।
बीजेपी का दावा: कांग्रेस के भीतर ही है फूट
विपक्ष के इन तमाम आरोपों के बीच बीजेपी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मंगलवार को दावा किया कि यह कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी का नतीजा है। उन्होंने इशारा किया कि नटराजन की उम्मीदवारी में खामियों की जानकारी देने वाले दस्तावेज तेलंगाना (जो कि एक कांग्रेस शासित राज्य है) से मिले थे। विजयवर्गीय ने अंदेशा जताया कि संभवतः कांग्रेस के ही किसी व्यक्ति ने यह जानकारी बाहर लीक की है।
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