राज्यसभा चुनाव: TMC छोड़ने वाले तीनों पूर्व सांसद अब BJP उम्मीदवार, आज ही हुए थे शामिल; RS में बढ़ जाएगी NDA की ताकत
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों सुखेंदु शेखर राय, प्रकाश चिक बड़ाइक और सुष्मिता देव गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। उनके पार्टी में शामिल होने से इस बात की अटकलें तेज हो गई थीं कि तीनों को उम्मीदवार बनाया जाएगा।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के जिन तीन राज्यसभा सांसदों ने पिछले महीने संसद के उच्च सदन से इस्तीफा दिया था, उन तीनों को भाजपा ने उन्हीं सीटों पर होने वाले उप चुनाव में उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले ये तीनों पूर्व सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देब और प्रकाश चिक बड़ाईक कोलकाता में भाजपा में आज (गुरुवार, 9 जुलाई को) शामिल हुए थे। पार्टी ज्वाइन करते ही भाजपा ने तीनों को इनाम देते हुए राज्यसभा उप चुनाव में उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने इस आशय का पत्र जारी करते हुए तीनों के नामों का ऐलान किया है।
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 24 जुलाई को उपचुनाव होगा। ये सीट तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्यों सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के इस्तीफे की वजह से ही खाली हुई हैं। इन नेताओं ने विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे और जून में संसद के उच्च सदन और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था। रॉय और बड़ाईक का कार्यकाल सितंबर 2029 तक था, जबकि देब का कार्यकाल अप्रैल 2030 में समाप्त होता। तृणमूल कांग्रेस के इस समय राज्यसभा में नौ सदस्य हैं।
जीत के आंकड़े भाजपा के पक्ष में
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास पश्चिमी बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में कुल 208 सदस्य हैं, इसलिए आंकड़े पूरी तरह से पार्टी के पक्ष में हैं। पार्टी को तीन उम्मीदवारों के लिए क्रमशः लगभग 70, 69 और 69 वोट आसानी से मिल सकता सकती है, जिससे तीनों सीट पर उपचुनावों में उसकी जीत की प्रबल संभावना है। राज्यसभा चुनाव प्रणाली के तहत, तीन सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए करीब 70 'प्रथम वरीयता' वाले मतों की जरूरत होगी। विधानसभा में भाजपा की मौजूदा ताकत के मद्देनजर वह दूसरे दलों के समर्थन पर निर्भर रहे बिना तीन उम्मीदवारों के लिए जरूरी संख्या बल जुटा सकती है।
एक उम्मीदवार को चाहिए 70 वोट
यह गणित मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सामने मौजूद चुनौती को भी दर्शाता है। भाजपा उम्मीदवार को हराने के लिए किसी भी विरोधी उम्मीदवार को कम से कम 70 मतों की जरूरत होगी। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुने गए विधायकों की कुल संख्या अब भी लगभग 80 है, लेकिन पार्टी का विधायक दल अब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के बीच बंट गया है। इसलिए, इनमें से किसी भी गुट के पास 70 का संख्या बल नहीं है। इस चुनाव में भाजपा की जीत से राज्यसभा में NDA की ताकत बढ़ जाएगी। इन तीन सीटों के जीतते ही उच्च सदन में भाजपा की ताकत बढ़कर 117 और NDA की 145 हो जाएगी। हालांकि, तब भी NDA राज्यसभा में दो तिहाई के आंकड़े (162) से दूर ही रहेगी।
TMC के पास एक सीट जीतने की ताकत लेकिन वो बंटी हुई
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक सैद्धांतिक रूप से, एकजुट तृणमूल कांग्रेस एक उम्मीदवार को जिताने की ताकत रखती है। हालांकि, संगठन के भीतर गहराते झगड़े के कारण ऐसी समझ बनने की संभावना कम होती जा रही है।इसलिए, उपचुनावों का महत्व केवल आंकड़ों के खेल से कहीं अधिक है। यह उपचुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब तृणमूल कांग्रेस पार्टी पर नियंत्रण के लिए अभूतपूर्व लड़ाई में उलझी हुई है। विरोधी गुट एक ही समय में निर्वाचन आयोग के सामने पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक ढांचे पर अपना दावा ठोक रहे हैं।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


