
काशी तमिल संगमम जाने वालों के लिए खुशखबरी, तमिलनाडु से काशी जाएंगी ये 7 स्पेशल ट्रेनें
तमिलनाडु के प्रमुख शहरों से वाराणसी के लिए कुल 7 विशेष ट्रेन सुव्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से चलेंगी। समय पर वापसी यात्रा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने वाराणसी से कई विशेष ट्रेन सेवाओं की भी व्यवस्था की है।
भारतीय रेलवे काशी तमिल संगमम 4.0 में बड़े पैमाने पर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कन्याकुमारी, चेन्नई, कोयंबटूर और वाराणसी के बीच 7 विशेष ट्रेन चला रहा है, जिससे तमिल भाषी क्षेत्र और काशी के प्राचीन आध्यात्मिक केंद्र के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे। रेल मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इन विशेष ट्रेनों का संचालन प्रतिभागियों को बहुदिवसीय सांस्कृतिक समागम कार्यक्रम में पहुंचने के लिए निर्बाध यात्रा, आरामदायक लंबी दूरी की संपर्कता और समय पर आगमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।
मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘विशेष ट्रेन सेवाओं की शुरुआत 29 नवंबर को कन्याकुमारी से पहली ट्रेन के प्रस्थान के साथ हुई। इसके बाद दो दिसंबर को चेन्नई से एक अतिरिक्त विशेष ट्रेन रवाना हुई। अब तीन दिसंबर को कोयंबटूर से, 6 दिसंबर को चेन्नई से, 7 दिसंबर को कन्याकुमारी से, 9 दिसंबर को कोयंबटूर से और 12 दिसंबर को चेन्नई से विशेष ट्रेन रवाना होंगी।’ मंत्रालय के अनुसार, इन नियोजित प्रस्थानों के साथ तमिलनाडु के प्रमुख शहरों से वाराणसी के लिए कुल 7 विशेष ट्रेन सुव्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से चलेंगी। समय पर वापसी यात्रा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने वाराणसी से कई विशेष ट्रेन सेवाओं की भी व्यवस्था की है।
स्पेशल ट्रेनों के बारे में ये रही डिटेल
प्रेस नोट में कहा गया, '5 दिसंबर को कन्याकुमारी, 7 दिसंबर को चेन्नई और 9 दिसंबर को कोयंबटूर के लिए विशेष ट्रेन रवाना होंगी। इसके बाद 11 दिसंबर को चेन्नई, 13 दिसंबर को कन्याकुमारी, 15 दिसंबर को कोयंबटूर और 17 दिसंबर, 2025 को फिर से चेन्नई के लिए अतिरिक्त वापसी सेवाएं निर्धारित हैं।’ तमिलनाडु और काशी के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंध को जारी रखने के लिए मंगलवार को काशी तमिल संगमम 4.0 शुरू हुआ। अधिकारियों ने बताया कि यह संस्करण ‘आइए तमिल सीखें - तमिल करकलम‘ के ध्येयवाक्य पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य वाराणसी के स्कूलों में तमिल-शिक्षण पहल, काशी क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए तमिलनाडु के अध्ययन दौरे और तेनकासी से काशी तक प्रतीकात्मक ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान के माध्यम से दोनों क्षेत्रों के बीच भाषाई और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।





