
'बिलासपुर ट्रेन हादसे के लिए चालक दल जिम्मेदार', अब ड्राइवर के डिब्बे में भी CCTV लगाएगा रेलवे
संक्षेप: बिलासपुर ट्रेन हादसे में 53 वर्षीय लोको पायलट विद्या सागर की मौत हो गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सागर लगभग दो दशकों से रेलवे सेवा में थे और बेहद अनुभवी चालक माने जाते थे।
हाल ही में हुए दर्दनाक रेल हादसे के बाद भारतीय रेलवे ने सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) जोन के अंतर्गत यात्री ट्रेनों के लोकोमोटिव (इंजन) केबिन और कोचों में अब सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस काम की शुरुआत कर दी गई है।

यह कदम उस समय उठाया गया है जब कुछ दिन पहले एक मालगाड़ी और एक मेमू यात्री ट्रेन के बीच टक्कर में 11 लोगों की मौत हो गई थी और 20 यात्री घायल हुए थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि यात्री ट्रेन का एक हिस्सा मालगाड़ी पर चढ़ गया था।
इस हादसे के बाद रेल सुरक्षा आयुक्त (CRS) ने जांच शुरू कर दी है। अब तक 19 रेलवे कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं और उनसे संबंधित दस्तावेज भी मांगे गए हैं। CRS, जो कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन एक स्वतंत्र संस्था है, वह जल्द ही सहायक लोको पायलट रश्मि राज का बयान भी दर्ज करेगी। रश्मि वर्तमान में इलाजरत हैं।
जांच में प्राथमिक निष्कर्ष
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हादसे का कारण ट्रेन चालक दल की लापरवाही बताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि चालक दल खतरे के संकेत पर ट्रेन को नियंत्रित करने में असफल रहा और उन्होंने सिग्नल पार कर ट्रेन को समय पर नहीं रोका, जिससे ‘SPAD केस’ हुआ। ‘SPAD’ उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई ट्रेन बिना अनुमति के लाल सिग्नल पार कर जाती है।
अनुभवी लोको पायलट की मौत
हादसे में 53 वर्षीय लोको पायलट विद्या सागर की मौत हो गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सागर लगभग दो दशकों से रेलवे सेवा में थे और बेहद अनुभवी चालक माने जाते थे। अधिकारी ने यह भी कहा कि अगर इंजन में सीसीटीवी कैमरे लगे होते, तो हादसे के सही कारणों की पहचान करना आसान होता।
पुराना हादसा याद दिला गया
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, यह बिलासपुर जिले में 1997 के बाद दूसरा बड़ा रेल हादसा है। वर्ष 1997 में अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस की पांच बोगियां नदी में गिर गई थीं, जिसमें 81 लोगों की मौत हुई थी।
सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार का निर्णय
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इसी साल जुलाई में ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने को मंजूरी दी थी। रेलवे के अनुसार, यह कदम यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने, चालक दल की निगरानी रखने और हादसों की जांच को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कैमरे लगने से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि किसी भी घटना की जांच में साक्ष्य के तौर पर इन रिकॉर्डिंग्स की अहम भूमिका रहेगी।





