राहुल ने मनाया फिर भी इस्तीफा वापस लेने को तैयार नहीं भूपेन बोरा? भाजपा का खुला ऑफर
भूपेन बोरा के इस्तीफे से राज्य में राजनीतिक भूचाल आ गया है। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के भाजपा में शामिल होने के न्योते और रकिबुल हुसैन के साथ आंतरिक कलह के बीच, बोरा आज रात अपना अंतिम फैसला सुनाएंगे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने अपने इस्तीफे की पेशकश के बाद पार्टी के भीतर मचे घमासान पर चुप्पी तोड़ी है। बोरा के इस कड़े रुख ने न केवल कांग्रेस आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नया शब्द 'APCC(R)' भी उछाल दिया है। भूपेन बोरा ने सोमवार को कांग्रेस पार्टी से अपना इस्तीफा आलाकमान को भेज दिया था। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व के दबाव और मान-मनौव्वल के बाद उन्होंने कहा है कि वह मंगलवार रात तक अपना अंतिम फैसला लेंगे कि इस्तीफा वापस लेना है या नहीं। बोरा का कहना है कि वह अंतिम निर्णय लेने से पहले अपने शुभचिंतकों, सहयोगियों और अपने गृह जिले लखीमपुर के लोगों से चर्चा करना चाहते हैं।
कांग्रेस के भीतर दो फाड़: APCC बनाम APCC (R)
भूपेन बोरा ने कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह को खुलकर उजागर किया है। उन्होंने बिना नाम लिए धुबरी के सांसद रकिबुल हुसैन पर निशाना साधा। बोरा ने कहा कि वे कांग्रेस (APCC) में रहने को तैयार हैं, लेकिन APCC (R) में नहीं। यहां 'R' का संकेत रकिबुल हुसैन की ओर माना जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि असम कांग्रेस अब दो गुटों में बंट गई है और कई नेता APCC (R) के वर्चस्व से परेशान हैं।
भूपेन बोरा ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका इस्तीफा पूरी तरह से वापस लिया जाना अभी तय नहीं है। उन्होंने दो वरिष्ठ नेताओं- नगांव के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और सीएलपी नेता देवव्रत सैकिया को मध्यस्थ के रूप में अधिकृत किया है। बोरा का कहना है कि यदि ये दोनों नेता उन्हें यह समझाने में सफल रहे कि बोरा का रुख गलत था, तो वह इस्तीफा वापस ले लेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वह पूरे दिन प्रद्युत बोरदोलोई के फोन और उनकी दलीलों का इंतजार करेंगे।
बोरा ने कहा- कल, नागांव से MP प्रद्युत बोरदोलोई और CLP लीडर देबब्रत सैकिया मेरे घर आए। उनके सामने, मैंने बाकी सभी नेताओं से कहा कि वे मेरा इस्तीफा देख लें। मैंने प्रद्युत बोरदोलोई और देबब्रत सैकिया को यह अधिकार दिया कि अगर इन दोनों नेताओं को यकीन हो जाता है कि भूपेन कुमार बोरा गलत हैं, और हां, भविष्य में ऐसा कभी नहीं होगा, तो मैं अपना इस्तीफा वापस ले लूंगा। आज सुबह, प्रद्युत बोरदोलोई ने मुझे फोन किया। मैं पूरा दिन इंतजार करूंगा और अगर प्रद्युत बोरदोलोई और देबब्रत सैकिया मुझे यकीन दिला पाते हैं कि हां, यह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी है, तो मैं अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए तैयार हूं। यह APCC नहीं है, यह अब APCCR है। इसलिए मैं APCC(R) में काम करने के लिए तैयार नहीं हूं। अभी यह मेरी जानकारी और जमीर के हिसाब से APCC नहीं है। यह AGPP, NCP, TMC जैसा APCC है। यह R ब्रैकेट में APCC है। आप जाकर एनालाइज करें।
बोरा की नाराजगी का एक बड़ा कारण सामगुरी विधानसभा उपचुनाव का टिकट न मिलना है। उन्होंने दावा किया कि कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके नाम का सुझाव दिया था, लेकिन टिकट रकिबुल हुसैन के बेटे तंजील हुसैन को दिया गया (जो बाद में भाजपा से चुनाव हार गए)।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा का 'ओपन ऑफर'
इस राजनीतिक संकट के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने आग में घी डालने का काम किया है। सीएम सरमा ने कहा कि भाजपा के दरवाजे बोरा के लिए खुले हैं। उन्होंने वादा किया कि अगर बोरा भाजपा में शामिल होते हैं, तो उन्हें एक 'सुरक्षित सीट' से चुनाव जिताकर विधानसभा भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री आज शाम बोरा के आवास पर उनसे मुलाकात भी कर सकते हैं, जिसे बोरा ने गर्व की बात बताया है।
भूपेन बोरा ने अपनी स्थिति की तुलना खुद हिमंत विश्व शर्मा के कांग्रेस छोड़ने के घटनाक्रम से की। उन्होंने कहा कि जैसे हिमंत विश्व शर्मा को 58 विधायकों का समर्थन होने के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया और उन्हें पार्टी छोड़ने पर मजबूर किया गया, क्या यह आंतरिक लोकतंत्र है? किसी को तो आवाज उठानी ही थी, और मैंने वही किया है।
कांग्रेस के राज्य प्रभारी जितेंद्र सिंह ने दावा किया है कि मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से बात होने के बाद बोरा ने इस्तीफा वापस ले लिया है। हालांकि, बोरा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी सिर्फ समय मांगा है, इस्तीफा वापस नहीं लिया है।
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