CJP प्रोटेस्ट और सोनम वांगचुक के अनशन से दूरी; आखिर राहुल गांधी की रणनीति क्या है?
Rahul Gandhi strategy on CJP and Sonam Wangchuk: जंतर-मंतर पर चल रहे सोनम वांगचुक के अनशन और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट से राहुल गांधी अब तक दूरी बनाए हुए हैं। खुद सोनम वांगचुक भी विपक्ष के बड़े नेता को लेकर सवाल कर चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है- आखिर राहुल गांधी की रणनीति क्या है?

Rahul Gandhi strategy on CJP and Sonam Wangchuk: राहुल गांधी कहां हैं? राहुल गांधी जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी और सोनम वांगचुक के सपोर्ट में अब तक क्यों नहीं आए? क्या आपके मन में भी यही सवाल है या फिर आपने सोशल मीडिया पर इस तरह के कमेंट, ट्वीट या पोस्ट देखें ही होंगे। इस तरह 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष का अब तक न पहुंचना एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
क्योंकि, अब तक कई विपक्षी इस आंदोलन को समर्थन दे चुके हैं। इनमें तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत कई विपक्षी नेता शामिल हैं। अगर कोई अब तक नहीं पहुंचा या समर्थन नहीं दिया तो वो हैं राहुल गांधी।
ऐसे में सवाल उठ रहा है- क्या राहुल गांधी की कोई खास रणनीति है? इन्हीं सवालों-आरोपों के बीच कांग्रेस ने साफ किया है कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दे से दूर नहीं हैं, बल्कि उनकी रणनीति अलग है। जानिए राहुल गांधी की आखिर क्या तैयारी है, सोनम वांगचुक ने क्या सवाल किया था? इसके साथ ही जानिए भाजपा-कांग्रेस और खुद सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके का क्या कहना है।
राहुल गांधी की अगली तैयारी क्या है?
कांग्रेस के मुताबिक, राहुल गांधी 17 जुलाई को देहरादून में अपने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत बड़ा कार्यक्रम करने जा रहे हैं। इस अभियान की शुरुआत 17 जून को राजस्थान के कोटा से हुई थी। अभियान का मुख्य फोकस भी पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और छात्रों से जुड़े मुद्दे हैं। कांग्रेस का दावा है कि राहुल गांधी इन्हीं मुद्दों को लेकर देशभर में अभियान चला रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने क्या कहा?
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने कहा था कि अगर विपक्ष के बड़े नेता ऐसे जनहित के मुद्दों पर भी सामने नहीं आते हैं, तो जनता इसे पसंद नहीं करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह की दूरी राजनीतिक रूप से सही संदेश नहीं देती।
CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने हालांकि इस पूरे विवाद को अलग नजरिए से देखने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि असली सवाल यह नहीं होना चाहिए कि कौन नेता धरनास्थल पर आया और कौन नहीं आया। उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंदोलनकारियों से बातचीत क्यों नहीं कर रहे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अब तक पद पर क्यों बने हुए हैं।
दीपके ने यह भी बताया कि कई विपक्षी नेताओं ने आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, एनसीपी नेता रोहित पवार और कांग्रेस सांसद शशि थरूर समेत कई नेताओं का सार्वजनिक रूप से आभार भी जताया।
कांग्रेस ने कैसे किया बचाव?
गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कहा कि पार्टी ने कभी भी इस आंदोलन की अनदेखी नहीं की। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस देशभर में पेपर लीक के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रहे हैं। राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' अभियान भी उसी लड़ाई का हिस्सा है। मेवाणी ने कहा कि कांग्रेस और सोनम वांगचुक का आंदोलन एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।
राहुल पहले भी कर चुके हैं समर्थन
कांग्रेस यह भी याद दिला रही है कि राहुल गांधी पहले भी सोनम वांगचुक और लद्दाख से जुड़े आंदोलनों का समर्थन कर चुके हैं। वर्ष 2024 में लद्दाख मार्च के दौरान वांगचुक और अन्य लोगों की हिरासत पर राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना की थी। 2025 में लद्दाख में हुई हिंसा और वांगचुक पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाए जाने के बाद भी उन्होंने न्यायिक जांच की मांग की थी।
इन 2 तारीखों की रणनीति देखनी दिलचस्प होगी
अब सबकी नजर दो अहम तारीखों पर है। 17 जुलाई को राहुल गांधी देहरादून में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम करेंगे। वहीं, CJP ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस इस आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होती है या छात्रों के मुद्दे पर अपना अलग अभियान ही आगे बढ़ाती है।


