
इस देश में रेबीज ने मचाया आतंक, मदद के लिए आगे आया भारत; वैक्सीन और दवाईयां भेजीं
भारत ने प्रकोप से निपटने में सहायता के लिए टिमोर-लेस्टे को रेबीज वैक्सीन की 10,000 खुराकें और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की 2,000 शीशियों की एक तत्काल खेप भेजी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पहले ही वैक्सीन की खेप यहां भेज चुका है।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देश टिमोर लेस्ते इन दिनों रेबीज के प्रकोप से जूझ रहा है। ऐसे में भारत ने अपने विश्व बंधुत्व के कर्तव्य को निभाते हुए यहां पर रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की मदद भेजी है। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक भारत ने टिमोर लेस्टे के लोगों को रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए वैक्सीन की करीब 10 हजार खुराकें और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की करीब 2 हजार शीशीयां भेजी हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर डाले एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, "भारत ने प्रकोप से निपटने में सहायता के लिए टिमोर-लेस्टे को रेबीज वैक्सीन की 10,000 खुराकें और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की 2,000 शीशियों की एक तत्काल खेप भेजी है। भारत ग्लोबल साउथ के लिए एक विश्वसनीय स्वास्थ्य साझेदार और विश्वसनीय सबसे पहले प्रतिक्रिया करने वाला देश बनने के लिए प्रतिबद्ध है।"
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक टिमोर-लेस्टे में मार्च 2024 में पहला मानव रेबीज का मामला सामने आया था। इसके बाद संगठन ने देश के स्वास्थ्य मंत्रालय को करीब 6000 रेबीज वैक्सीन और 2000 इम्युनोग्लोबुलिन की शीशीयाँ भेजी थी। इसके बाद 31 अगस्त को संगठन ने 10000 अतिरिक्त वैक्सीन खुराक और 1000 अतिरिक्त आरआईजी खुराक भी भिजवाईं थीं। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन भारत और इंडोनेशिया समेत अन्य साझेदारों के सहयोग से 12000 अतिरिक्त वैक्सीन समेत 2000 आरआईजी की खुराकों को पहुंचाने में सफल हुआ है।
इस बीमारी से निपटने के लिए टिमोर-लेस्ते की सरकार ने भी एक राष्ट्रीय टास्क फोर्ट का गठन किया है। यह टॉस्क फोर्स विभिन्न क्षेत्रों में उपायों के समन्वय के लिए प्रतिदिन बैठकें करती है, जिसमें मानव और पशु स्वास्थ्य के प्रयासों के साथ-साथ रेबीज उन्मूलन के लिए जन जागरूकता भी शामिल है।
भारत और टिमोर लेस्टे के संबंध
गौरलतब है कि भारत और टिमोर लेस्टे के बीच में लंबे समय से बेहतर दीर्घकालिक संबंध हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 2002 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मई 2002 में टिमोर-लेस्टे के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लिया था। इसके बाद जनवरी 2003 में राजनयिक संबंध स्थापित करने हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।
भारत द्वारा यह सहायता ऐसे समय में दी जा रही है जब टिमोर-लेस्टे एक महत्वपूर्ण राजनयिक उपलब्धि हासिल कर रहा है। 26 अक्टूबर को, कुआलालंपुर में आयोजित 47वें आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान, देश को औपचारिक रूप से दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) के 11वें सदस्य के रूप में शामिल किया गया, जो 26 वर्षों में समूह का पहला विस्तार था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में अपने वर्चुअल संबोधन के दौरान टिमोर-लेस्टे के आसियान में शामिल होने का स्वागत किया। आसियान को "भारत की एक्ट ईस्ट नीति का मुख्य स्तंभ" बताया था। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और आसियान मिलकर "विश्व की एक चौथाई आबादी" का प्रतिनिधित्व करते हैं और "गहरे ऐतिहासिक संबंध और साझा मूल्य" साझा करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "मैं आसियान के नए सदस्य के रूप में टिमोर-लेस्टे का स्वागत करता हूँ।"





