एक कार कंपनी ने 31 साल पहले बनाया था दुनिया का पहला QR कोड, आप जानते हैं पूरा नाम

Jan 23, 2026 01:02 pm ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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इसका फुल फॉर्म भी कम लोगों की मालूम होगा, जो है- Quick Response code। दुनिया का पहला QR कोड 1994 में जापान में बना था। यही नहीं इसके आविष्कार की कहानी भी दिलचस्प है। इसे पहली बार किसी फिनटेक कंपनी या किसी बैंकिंग कंपनी ने तैयार नहीं किया था बल्कि एक कार कंपनी का यह आविष्कार था।

एक कार कंपनी ने 31 साल पहले बनाया था दुनिया का पहला QR कोड, आप जानते हैं पूरा नाम

भारत में नोटबंदी के बाद से डिजिटल पेमेंट में बड़ी तेजी आई है। 5, 10 या 50 रुपये तक की पेमेंट भी लोग अब धड़ल्ले से यूपीआई के माध्यम से कर रहे हैं और महज एक QR कोड स्कैन करते ही पेमेंट हो जाती है। QR कोड का बहुतायत में इस्तेमाल भले ही बीते कुछ सालों से बढ़ा है, लेकिन इसका आविष्कार काफी पहले हो गया था। इसका फुल फॉर्म भी कम लोगों की मालूम होगा, जो है- Quick Response code। दुनिया का पहला QR कोड 1994 में जापान में बना था। यही नहीं इसके आविष्कार की कहानी भी दिलचस्प है। इसे पहली बार किसी फिनटेक कंपनी या किसी बैंकिंग कंपनी ने तैयार नहीं किया था बल्कि एक कार कंपनी का यह आविष्कार था।

दुनिया की नामी कार कंपनी Toyota की सहायक कंपनी Denso Wave ने इसे तैयार किया था। इसे तैयार करने वाले थे जापान के ही मासाहिरो हारा। यह क्यूआर कोड इसलिए तैयार किया गया था कि कार के पार्ट्स को ट्रैक किया जा सके। इससे पहले 1D बारकोड हुआ करते थे, जिन्हें स्कैन करना आसान नहीं था और उनमें जानकारी भी सीमित ही रहती थी। लेकिन हारा ने उस समय एक क्रांति की नींव रख दी, जब सफेद और काली पट्टियों के पैटर्न वाला क्यूआर कोड तैयार कर दिया। इसकी खासियत यह थी कि इसे किसी भी दिशा से स्कैन किया जा सकता था।

तब विकसित हुए क्यूआर कोड की तकनीक का ही विकास हम देख रहे हैं कि जगह-जगह बारकोड लगे हुए हैं और लोग अपनी जरूरत की तमाम चीजों के लिए फट से स्कैन कर लेते हैं। सालों तक इन क्यूआर कोड्स का इस्तेमाल कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की जानकारी देने और क्लासिफिकेशन के लिए करती थीं। फिर जब ऑनलाइन पेमेंट का दौर आया तो हर रिसीवर की पहचान के लिए उसका एक यूनिक क्यूआर कोड तैयार कर दिया गया। अब यही कोड क्रांति बन गया है। यूपीआई पेमेंट्स का यह मुख्य बिंदु है।

6 साल तक जापान में ही होता रहा इस्तेमाल

पहला क्यूआर कोड तैयार होने के बाद करीब 6 सालों तक इसका इस्तेमाल जापान में ही होता रहा। शुरुआत में इसे टोयोटा कंपनी ही प्रयोग करती थी। इसका विस्तार होना तब शुरू हुआ, जब वर्ष 2000 में इसे ISO प्रमाणन मिला। अब यह स्थिति है कि दुनिया के हर कोने में QR कोड इस्तेमाल किए जाते हैं। किसी चीज की जानकारी देने, किसी का प्रोफाइल उसमें डालने या किसी इवेंट समेत तमाम चीजों का पूरा ब्योरा देने तक के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। यही नहीं अब क्यूआर कोड जनरेट करना भी बेहद इस्तेमाल हो गया और इंटरनेट पर ही तमाम ऐसी वेबसाइट्स हैं, जहां एक लिंक शेयर करके क्यूआर कोड तैयार किया जा सकता है।

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लेखक के बारे में

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दुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सूर्यप्रकाश को पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। 10 वर्षों से ज्यादा समय से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यों से संबंधित खबरों का संपादन करते हैं एवं डेस्क इंचार्ज के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। समाचारों के त्वरित प्रकाशन से लेकर विस्तृत अध्ययन के साथ एक्सप्लेनर आदि में भी रुचि रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज प्रकाशित करने और खबरों के अंदर की खबर को विस्तार से समझाने में रुचि रखते हैं। हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को समझते हैं और उसके अनुसार ही पाठकों को खबरें देने के लिए तत्परता रखते हैं।


अकादमिक योग्यता: एक तरफ डेढ़ दशक का सक्रिय पत्रकारिता करियर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सूर्यप्रकाश अकादमिक अध्ययन में भी गहरी दिलचस्पी रखते रहे हैं। पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन और मास्टर्स की पढ़ाई के साथ ही 'हाइब्रिड वारफेयर में मीडिया के इस्तेमाल' जैसे महत्वपूर्ण एवं उभरते विषय पर पीएचडी शोध कार्य भी किया है। पत्रकारिता, समाज, साहित्य में रुचि के अलावा वारफेयर में मीडिया के प्रयोग पर भी गहरा अध्ययन किया है। इसी कारण डिफेंस स्टडीज जैसे गूढ़ विषय में भी वह रुचि रखते हैं। इस प्रकार सूर्यप्रकाश का एक लंबा पेशेवर अनुभव रहा है तो वहीं गहरी अकादमिक समझ भी रही है।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय महत्व के समाचारों में गहरी दिलचस्पी रखते हैं तो वहीं नैरेटिव वारफेयर के बारे में भी गहरा अध्ययन है। खबरों के अंदर की खबर क्या है और किसी भी समाचार के मायने क्या हैं? ऐसी जरूरी चीजों को पाठकों तक पहुंचाने में भी रुचि रखते हैं। लाइव हिन्दुस्तान में बीते 5 सालों से जुड़े हैं और गुणवत्तापूर्ण समाचार देने की मुहिम को बल प्रदान किया है। सूर्यप्रकाश को पाठकों की पसंद को समझने और उसके अनुसार समाचारों के प्रस्तुतिकरण में भी महारत हासिल है। कठिन विषयों को सरल शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने की रुचि है और इसी कारण एक्सप्लेनर आदि भी लिखते हैं।

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