दोगुनी महंगी हुई कतर से आने वाली गैस, अब US से मंगाना पड़ेगा सस्ता; भारत में कब तक रहेगा LPG संकट

Mar 11, 2026 10:20 am ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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एलपीजी सिलेंडर की कमी से जूझ रहे होटल कारोबारियों के संगठन ने मंगलवार को कहा कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो देश भर में खासकर मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों के कई होटल और रेस्तरां अगले दो दिन में अपना कामकाज बंद करने को मजबूर हो सकते हैं।

दोगुनी महंगी हुई कतर से आने वाली गैस, अब US से मंगाना पड़ेगा सस्ता; भारत में कब तक रहेगा LPG संकट

मिडिल ईस्ट के संकट ने भारत को प्राकृतिक गैस के मोर्चे पर मुश्किल में डाल दिया है। अब भारत अमेरिका और नॉर्वे जैसे बाजारों का रुख कर सकता है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। एक ओर जहां होटल और रेस्त्रां मालिक LPG की कमी के कारण कीमतें बढ़ाने जैसे फैसले लेने पर विचार कर रहे हैं। वहीं, सरकार घरों में एलपीजी की पहुंच बगैर रोकटोक जारी रखने के लिए कदम उठा रही है। इसी बीच कहा जा रहा है कि भारत में ईंधन की समस्या कुछ समय तक तो जरूर रहेगी, लेकिन यह ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।

द हिंदू की रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया कि समस्या थोड़े ही समय की है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह अब ज्यादा हुईं कीमतों के चलते नॉर्वे और अमेरिका से मंगाना सस्ता पड़ने वाला है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि ऐसी खेप को भारत पहुंचने में समय लग सकता है।

एक अधिकारी ने बताया, 'एलएनजी के मामले में तत्काल बदलाव करना बहुत मुश्किल है।' उन्होंने कहा, 'कतर के अलावा हमारे दूसरे विकल्प नॉर्वे और अमेरिका से आने वाली गैस है। इसे भारत पहुंचने में बहुत समय लगेगा।' उन्होंने कहा, 'हम 6 से 8 डॉलर प्रति MMBTU के दर पर कतर से गैस ले रहे हैं। अब यह बढ़कर 15 डॉलर पर पहुंच गया है।'

उन्होंने समझाया कि अगर कीमत एक बार 10 डॉलर प्रति MMBTU से ऊपर पहुंच जाती है, तो भारत के लिए लंबी दूरी के बाद भी नॉर्वे और अमेरिका से गैस मंगाना सस्ता पड़ता है। MMBTU का मतलब Metric Million British Thermal Unit से है।

ज्यादा समय नहीं लगेगा

एक अन्य अधिकारी ने अखबार को बताया कि एलपीजी और एलएनजी, दोनों की ही सप्लाई अलग तरह से हो रहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सप्लाई दूरी पर हैं और उन्हें पहुंचने में समय लगेगा, 'लेकिन सप्लाई आ रहीं हैं।' अनुमान लगाया जा रहा है कि जहाजों को अमेरिका या नॉर्वे तक जाने और कार्गो लेकर भारत वापस आने में करीब दो महीनों का समय लगेगा।

अधिकारी ने कहा, 'दूसरे देशों को ऑर्डर देने और वहां से डिलीवरी मिलने के बीच कुछ समय लगेगा। गैस की समस्या लंबे समय तक नहीं रहेगी, लेकिन कुछ समय के लिए परेशानी जरूर हो सकती है।'

सरकार का कदम

अखबार से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि एलपीजी आउटपुट को 10 फीसदी बढ़ा दिया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने उद्योगों की तुलना में घरों में एलपीजी की पहुंच को प्राथमिकता दी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, एक और अधिकारी बताते हैं कि सरकार की प्राथमिकता उद्योगों को प्रभावित किए बगैर घरों तक घरों तक एलपीजी सप्लाई की है।

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र के लिए बगैर रोक टोक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक गैस के आवंटन में बदलाव किया है। इसके तहत एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस (पीएनजी) को अन्य सभी क्षेत्रों पर प्राथमिकता दी जाएगी।

एलपीजी सिलेंडर की अचानक किल्लत होने से होटल उद्योग में चिंता बढ़ने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपूर्ति से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने मंगलवार को पीटीआई भाषा को बताया कि यह समिति विभिन्न शहरों में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कमी की शिकायतों की समीक्षा करेगी और होटल और रेस्तरांओं की वास्तविक जरूरतों के अनुसार ईंधन उपलब्ध कराएगी।

कई उद्योग हो सकते हैं बंद

एलपीजी सिलेंडर की कमी से जूझ रहे होटल कारोबारियों के संगठन ने मंगलवार को कहा कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो देश भर में खासकर मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों के कई होटल और रेस्तरां अगले दो दिन में अपना कामकाज बंद करने को मजबूर हो सकते हैं। संगठन ने मामले के समाधान के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया है।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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