पुष्पा जहांगीर खान का ऐसा हाल, पुलिस ने हाफ पैंट में रोड पर घुमाया; कान पकड़कर मांगी माफी
TMC के बड़े नेताओं में शुमार जहांगीर खान का नाम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान खासा चर्चा में था। चुनाव आयोग ने फलता में उपचुनाव का ऐलान किया था, लेकिन खान ने वोटिंग से एक दिन पहले ही नाम वापस ले लिया था।

पश्चिम बंगाल के फलता में मशहूर बाहुबली पुष्पा उर्फ जहांगीर खान को पुलिस ने फिर परेड कराई है। खबर है कि इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के नेता को कमर पर रस्सी बांधकर फलता की सड़कों पर घुमाया गया और जनता से माफी भी मंगवाई। इससे पहले 11 जून को भी पुलिस ने पुष्पा की इसी तरह परेड कराई थी। खास बात है कि खान को लेकर TMC में भी खासा विवाद हुआ था कि उपचुनाव से नाम वापस लेने के बाद भी उन्हें पार्टी से क्यों नहीं निकाला गया था।
वीडियो में नजर आ रहा है कि जहांगीर के आसपास पुलिस घेरा मौजूद है। साथ ही उसकी कमर पर रस्सी बंधी हुई है और नंगे पैर चल रहा है। इतना ही नहीं वह पास से गुजर रही जनता से हाथ जोड़कर और कान पकड़कर माफी भी मांग रहा है। खास बात है कि जहांगीर को लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता था। फलता सीट उनके संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर के तहत आती है।
पुलिस पहले भी घुमा चुकी
2021 चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच के तहत जहांगीर को 11 जून को फलता के इलाकों में लेकर गई थी। तब अधिकारी ने बताया था कि जांच के सिलसिले में दोपहर के समय पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों की सुरक्षा में खान को जिले के सहारारहाट और आस-पास के इलाकों में ले जाया गया।
नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार
8 जून को बंगाल पुलिस के STF यानी स्पेशल टास्क फोर्स ने जहांगीर को नेपाल बॉर्डर से पकड़ा था। कहा जा रहा था कि वह देश छोड़ने की फिराक में था और रिजल्ट के बाद से ही फरार था। आरोप थे कि उसने चुनाव से पहले बूथ लेवल अधिकारियों पर दबाव डालकर मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराए थे।
चर्चा में ऐसे आया
बंगाल विधानसभा में जहांगीर खान का नाम भी बड़े मुद्दे के तौर पर सामने आया था। उस पर इलाके में भय और दबाव का माहौल बनाने के आरोप लगे थे। बढ़ती शिकायतों के बीच चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व अधिकारी और एनकाउंटर विशेषज्ञ अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया था। शर्मा ने इलाके के दौरे के दौरान सार्वजनिक रूप से जहांगीर खान को चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं देने की चेतावनी दी थी।
आलोचनाओं के जवाब में जहांगीर खान ने खुद की तुलना फिल्मी किरदार 'पुष्पा' से करते हुए कहा था कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। फलता विधानसभा क्षेत्र में चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ छेड़छाड़ और टेप लगाने जैसे विवाद भी सामने आये थे। बाद में चुनाव आयोग ने कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया था। दबाव बढ़ने के बाद जहांगीर खान ने मतदान से दो दिन पहले चुनावी मुकाबले से खुद को अलग कर लिया था और सार्वजनिक जीवन से गायब हो गया था। बाद में उसने अदालत का भी रुख किया था।
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लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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