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बैनामा ही रद्द कर दो, पुणे जमीन घोटाले को लेकर कोर्ट पहुंची पार्थ पवार की कंपनी

बैनामा ही रद्द कर दो, पुणे जमीन घोटाले को लेकर कोर्ट पहुंची पार्थ पवार की कंपनी

संक्षेप:

मुंढवा जमीन घोटाले मामले में आरोपी पार्थ पवार की कंपनी की तरफ से कोर्ट में वाद दायर करके कहा गया है कि इसका बैनामा निरस्त कर दिया जाए। जानकारी के मुताबिक इस याचिका पर 15 जनवरी 2026 को सुनवाई हो सकती है। 

Dec 23, 2025 01:24 pm ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ की सह-भागीदारी वाली कंपनी ‘अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी’ ने मुंढवा भूमि की मुख्तारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) धारक शीतल तेजवानी के खिलाफ बैनामा निरस्त कराने के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया है। कंपनी के एक अन्य साझेदार दिग्विजय पाटिल ने विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 की धारा 31 (लिखित दस्तावेज, जैसे बिक्री विलेख या अनुबंध का निरस्तीकरण) के तहत पुणे की एक अदालत में यह वाद दायर किया है।

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अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, मामले की सुनवाई 15 जनवरी, 2026 को की जाएगी। मुंढवा के पॉश इलाके में 40 एकड़ भूमि 300 करोड़ रुपये में अमाडिया एंटरप्राइजेज को बेचे जाने का मामला पिछले महीने उस समय जांच के घेरे में आया था, जब यह पाया गया कि यह भूखंड सरकार का है और इसे बेचा नहीं जा सकता। आरोप है कि कंपनी को 21 करोड़ रुपये के स्टाम्प शुल्क के भुगतान से भी छूट दी गई थी।

आरोप है कि भूमि के 272 ‘मूल वतनदारों’ की मुख्तारनामा धारक तेजवानी ने यह जानते हुए भी बिक्री विलेख निष्पादित किया और संपत्ति अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेची कि यह भूमि सरकार की है और इसे बेचा नहीं जा सकता।

आरोप है कि उप-निबंधक रवींद्र तारू ने बिक्री विलेख कराने में सहायता की। निबंधन महानिरीक्षक कार्यालय के अधिकारियों ने स्टाम्प शुल्क की चोरी के आरोप में दिग्विजय पाटिल, तेजवानी और तारू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अमाडिया एंटरप्राइजेज के बहुलांश हिस्सेदारी वाले पार्थ पवार का नाम प्राथमिकी में नहीं है। इस बीच जिला प्रशासन ने भी बिक्री विलेख निष्पादित करने के आरोप में पाटिल, तेजवानी और निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत येवले के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह प्राथमिकी खडक थाने में दर्ज की गई और इसकी जांच फिलहाल पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) कर रही है।

ईओडब्ल्यू ने तेजवानी को पिछले महीने गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल पिंपरी-चिंचवड में बावधन पुलिस की हिरासत में है, जबकि तारू को बावधन पुलिस ने गिरफ्तार किया था। येवले पर आरोप है कि उसने भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण को यह कहते हुए भूमि खाली करने का निर्देश देने वाला नोटिस जारी किया कि यह भूखंड अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेचा जा चुका है। मुंढवा की इस भूमि पर भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण का कब्जा है। पुणे की एक अदालत ने येवले की अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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