Hindi NewsIndia NewsProvide infrastructure courts will work day and night What is demand from the Centre Why Future CJI says
आप सुविधाएं तो दीजिए, अदालतें दिन-रात काम करेंगी; भावी CJI ने क्यों कहा ऐसा? केंद्र से क्या मांग

आप सुविधाएं तो दीजिए, अदालतें दिन-रात काम करेंगी; भावी CJI ने क्यों कहा ऐसा? केंद्र से क्या मांग

संक्षेप: एनआईए मामलों में बड़ी संख्या में गवाहों के शामिल किए जाने के मुद्दे पर पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष को बड़ी सूची में कटौती करनी चाहिए तथा उन पर भरोसा करना चाहिए जो सबसे अधिक विश्वसनीय हैं।

Tue, 18 Nov 2025 10:47 PMPramod Praveen भाषा, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र से कहा कि वह आवश्यक न्यायिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराए। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि वह सुनिश्चित करेगा कि अदालतें दिन-रात काम करें और राष्ट्र के खिलाफ अपराध करने वाले तथा जघन्य अपराधों में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई छह महीने में पूरा हो जाए। अगले हफ्ते देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत, और जस्टिस उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दुर्दांत अपराधियों के खिलाफ शीघ्र सुनवाई की वकालत करते हुए कहा कि यदि मुकदमा छह महीने में पूरा हो जाता है तो आरोपी को लंबी सुनवाई के आधार पर जमानत नहीं मिल सकेगी।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी से कहा, ‘‘आप बस आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएं जिससे मुकदमा तेजी से पूरा होगा, ताकि राष्ट्र के खिलाफ अपराध करने वालों या जघन्य अपराधों में शामिल लोगों को जमानत न मिले। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अदालतें छह महीने में मुकदमा पूरा करने के लिए दिन-रात काम करें।’’

गृह सचिव इस मामले से अवगत हैं: ASG

एएसजी ने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव इस मामले से अवगत हैं और विशेष एनआईए अदालतों तथा विशेष कानूनों के लिए अन्य समर्पित अदालतों की स्थापना के मुद्दे पर विभिन्न राज्य सरकारों के साथ बैठक की गई है। पीठ ने कहा कि आजकल मुकदमेबाजी की लागत बहुत अधिक है और यदि मुकदमा छह महीने में पूरा हो जाए तो यह सभी पक्षों के लिए फायदेमंद होगा।

ये भी पढ़ें:खाली पद भरवाइए मीलॉर्ड! वरना बंद हो जाएगा… केंद्र के खिलाफ वकीलों की गुहार

शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) को गवाहों की गवाही के लिए अदालतों की ऑनलाइन सुविधा का लाभ उठाना चाहिए, ताकि वे दूर-दराज के स्थानों से भी स्वतंत्र रूप से गवाही दे सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि मुकदमे की सुनवाई तेजी से हो। पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘आपको गवाह संरक्षण योजना के तहत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और उन्हें श्रीनगर या अन्य दूर स्थानों से दिल्ली आने की आवश्यकता नहीं है।’’

गृह मंत्रालय कर रहा विचार

एनआईए मामलों में बड़ी संख्या में गवाहों के शामिल किए जाने के मुद्दे पर पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष को बड़ी सूची में कटौती करनी चाहिए तथा उन पर भरोसा करना चाहिए जो सबसे अधिक विश्वसनीय हैं। भाटी ने शीर्ष अदालत को भरोसा दिया कि गृह मंत्रालय इन मुद्दों पर पहले से ही विचार-विमर्श कर रहा है और जल्द ही अदालत के समक्ष एक खाका प्रस्तुत किया जाएगा।

ये भी पढ़ें:राजनीतिक लड़ाई के लिए मशीनरी का इस्तेमाल क्यों करते हैं?; SC की CBI को फटकार

इससे पहले, माओवादी समर्थक कैलाश रामचंदानी और गैर कानूनी गतिविधि अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार कुख्यात अपराधी महेश खत्री से जुड़े एनआईए मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने विशेष कानूनों के तहत मामलों के लिए अदालतें नहीं गठित पर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई और चिंता जताई कि अदालतें आरोपियों को जमानत देने के लिए मजबूर होंगी।

समयबद्ध तरीके से मुकदमे निपटाने के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं

न्यायालय ने कहा था, ‘‘यदि प्राधिकार एनआईए अधिनियम और अन्य विशेष कानूनों के तहत त्वरित सुनवाई के लिए अपेक्षित बुनियादी ढांचे के साथ अदालतें स्थापित करने में विफल रहता है, तो अदालत को अनिवार्य रूप से आरोपी को जमानत पर रिहा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि समयबद्ध तरीके से मुकदमे को समाप्त करने के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है।’’शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली निवासी रामचंदानी की जमानत याचिका पर यह आदेश पारित किया। रामचंदानी पर 2019 में एक आईईडी विस्फोट में राज्य पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया टीम के 15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने के बाद मामला दर्ज किया गया था।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।