लोकसभा सीटें 850 हुईं तो UP में बढ़ेंगे सबसे ज्यादा सांसद, देखें राज्यवार स्थिति
विधेयक में लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। यह आरक्षण रोटेशन के आधार पर लागू होगा।

महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए सरकार 3 विधेयक संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। अगर इनपर मुहर लग जाती है, तो देश में लोकसभा सीटों में इजाफा होगा और ये 543 से बढ़कर अधिकतम 850 तक पहुंच जाएंगी। इन विधेयकों को 16 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया जाएगा। सवाल है कि इनके लागू होने के बाद किस राज्य में कितनी लोकसभा सीटें होंगी और किस राज्य में संख्या सबसे ज्यादा बढ़ेगी।
प्रावधानों में क्या
इनके प्रावधानों में कहा गया है कि 815 सीटों राज्यों को दी जाएंगी। पहले यह संख्या 530 थी। जबकि, केंद्र शासित प्रदेशों के पास पहले से मौजूद 15 सीटों का आंकड़ा बढ़कर 35 हो जाएगा। विधेयक में निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। सरकार जो तीन विधेयक लाने जा रही है उनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 व केंद्र शासित कानून (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं।
महिलाओं के लिए आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगा
विधेयक में लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। यह आरक्षण रोटेशन के आधार पर लागू होगा, यानी अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगा। यानी 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक।
आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी, ताकि महिलाओं का हर जगह प्रतिनिधित्व मिल सके। वर्तमान लोकसभा या विधानसभा की संरचना उसके कार्यकाल समाप्त होने तक यथावत बनी रहेगी और इस दौरान होने वाले उपचुनाव पुराने परिसीमन के आधार पर ही कराए जाएंगे।
किन राज्यों में बढ़ेंगी सीटें
माना जा रहा है कि उत्तर के राज्यों में नई सीटों की संख्या में खास इजाफा देखने को मिलेगा। 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में संख्या बढ़कर करीब 125 हो सकती है। वहीं, बिहार में लोकसभा की सीटें 40 से बढ़कर 62 और महाराष्ट्र में 48 से बढ़कर 75 हो सकती हैं। संभावनाएं जताई जा रहीं हैं कि तमिलनाडु में सीटों की संख्या 39 से बढ़कर 61 हो सकती है। केरल में आंकड़ा 20 से बढ़कर 31 पर जा सकता है।
विपक्ष की चिंता
अब विपक्ष सीटों में होने वाले अंतर को लेकर चिंता जाहिर कर रहा है। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में सीटें बढ़ने का प्रतिशत तो एक ही होगा, लेकिन संख्या बदल जाएगी। एक ओर जहां यूपी में 45 नई सीटें जुड़ेंगी। वहीं, तमिलनाडु के खाते में 22 आएंगी। सरकार का कहना है कि 2029 तक महिलाओं को आरक्षण देने का यही इकलौता सही तरीका है। अगर इसे किसी और तरीके से किया गया, तो राज्यों की सीटों का गणित बिगड़ सकता है।
लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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