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केंद्र और राज्य के नियम अलग, RSS के कार्यक्रम में नहीं जाएंगे कर्मचारी; खरगे की दो-टूक

केंद्र और राज्य के नियम अलग, RSS के कार्यक्रम में नहीं जाएंगे कर्मचारी; खरगे की दो-टूक

संक्षेप:

खरगे ने कहा कि भारत सरकार के कर्मचारियों के लिए सेवा आचरण नियम राज्य के कर्मचारियों से अलग हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि केंद्रीय कर्मचारी आरएसएस की गतिविधियों का हिस्सा बन सकते हैं। लेकिन राज्य के नियम इससे भिन्न हैं। इसलिए राज्य के कर्मचारी इसमें हिस्सा नहीं ले सकते।

Tue, 21 Oct 2025 02:39 AMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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कर्नाटक सरकार और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बीच मामता लंबा खिंचता नजर आ रहा है। सोमवार को राज्य के आईटी बीटी मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारी अपने सेवा आचरण नियमों के अनुसार आरएसएस की गतिविधियों का हिस्सा नहीं बन सकते। अगर कोई इसका उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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खरगे से जब कलबुर्गी के सेदम तालुक में संघ के पथ संचलन में शामिल हुए चिकित्सा अधिकारी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में अधिकारी जांच करेंगे। अगर किसी ने इस तरह की भागीदारी की है और उसके सबूत सामने हैं, तो सरकार जरूर कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा,"हम ऐसी सुनी-सुनाई बातों पर नहीं, बल्कि सबूतों के आधार पर कार्रवाई करेंगे।"

केंद्रीय नियमों से अलग हैं, राज्य के नियम: खरगे

इकॉनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक खरगे ने कहा कि भारत सरकार के कर्मचारियों के लिए सेवा आचरण नियम राज्य के कर्मचारियों से अलग हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि केंद्रीय कर्मचारी आरएसएस की गतिविधियों का हिस्सा बन सकते हैं। लेकिन राज्य के नियम इससे भिन्न हैं। इसलिए राज्य के कर्मचारी इसमें हिस्सा नहीं ले सकते।

गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। इसमें मंत्री प्रियंक खरगे फ्रंट फुट पर खेल रहे हैं। सरकार ने अपनी बात पर अमल लाते हुए आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने वाले एक पंचायत विकाकस अधिकारी को निलंबित कर दिया है। भारतीय जानता पार्टी ने इस कदम कि निंदा की है, साथ ही पेशे से वकील भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने अधिकारी का पक्ष अदालत में भी रखने की पेशकश की है।

आपको बता दें फिलहाल इस बात पर विवाद है कि सेदम के तालुम में राजस्व अधिकारियों ने आरएसएस को पथसंचलन की अनुमति नहीं थी। हालांकि इसके बाद भी स्वयंसेवकों ने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सफलता पूर्वक पथ संचलन किया। जब पुलिस ने इसे रोकने की कोशिश की, तो आरएसएस के स्वयंसेवकों ने इसका विरोध किया। इसके बाद पुलिस ने कई स्वयंसेवकों को गिरफ्तार कर लिया। हाालंकि कुछ देर बाद ही उन्हें छोड़ दिया गया।

आरएसएस के साथ बढ़ते टसल के बीच राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पूर्वानुमति अनिवार्य कर दी है। ऐसे में यह स्वीकृति आरएसएस के कार्यक्रमों में बाधा बन रही है।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak
उपेन्द्र पिछले कुछ समय से लाइव हिन्दुस्तान के साथ बतौर ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (2023-24 बैच) से पूरी की है। इससे पहले भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, राजनीति के साथ-साथ खेलों में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
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