पीएम और मेरी तो पत्नी ही नहीं हैं... राहुल गांधी ने ऐसा क्या कहा कि सदन में लगने लगे ठहाके

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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राहुल गांधी ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी दादी ने डर से लड़ना सिखाया। उन्होंने कहा कि उनकी दादी ने उन्हें सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया।

पीएम और मेरी तो पत्नी ही नहीं हैं... राहुल गांधी ने ऐसा क्या कहा कि सदन में लगने लगे ठहाके

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महिला आरक्षण संशोधन बिल यानी 131वें संविधान संशोधन बिल पर चर्चा की शुरुआत करते हुए आज (शुक्रवार, 17 अप्रैल को) कुछ ऐसा कहा कि सदन में सदस्यगण ठहाका लगाने लगे। दरअसल, हुआ ये कि जैसे ही राहुल गांधी इस बिल पर अपनी बात कहने के लिए खड़े हुए तो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें टोकते हुए पूछ दिया कि हाथ में क्या हुआ? इस पर राहुल ने कहा कि चोट लगी है। इसके बाद राहुल गांधी बिल पर बोलने का मौका देने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और अपनी बात कहनी शुरू कर दी।

राहुल ने कहा कि आज राष्ट्रीय परिदृश्य में महिलाएं सेंट्रल फोर्स हैं और वह ड्राइविंग फोर्स बन चुकी हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि यहां मौजूद हम सभी ने महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है। हम सभी के जीवन में मां-बहन के रूप में महिलाएं हैं। राहुल ने कहा, "माता, बहन, पत्नी और अन्य रूपों में महिलाओं ने हमारे जीवन को बहुत प्रभावित किया है। हालांकि, पीएम और मेरी तो पत्नी ही नहीं हैं।" इतना सुनते ही सदन में लोग ठहाका लगाने लगे और राहुल गांधी भी मुस्कुराने लगे। उस समय सदन का माहौल बिल्कुल हल्का हो गया।

इस मामले में मुझे वह अनुभव नहीं

राहुल ने कहा कि इस मामले में मुझे वह अनुभव प्राप्त नहीं है लेकिन मुझे महिला के अन्य रूपों ने काफी प्रभावित किया है। उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि कल जब वह स्पीच दे रही थीं, तो पांच मिनट के अंदर ही उन्होंने वह कर दिखाया जो मैं 20 साल में नहीं कर पाया। अमित शाह जी के चेहरे पर भी स्माइल आ गई थी।

दादी इंदिरा का भी किया जिक्र

इसके बाद राहुल गांधी ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी दादी ने डर से लड़ना सिखाया। उन्होंने कहा कि उनकी दादी ने उन्हें सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया। इसके साथ ही उन्होंने अपने बचपन की एक कहानी सुनाई और डर की चर्चा के साथ ही राहुल ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधना शुरू कर दिया। राहुल गांधी ने कहा कि यह सरकार भी ऐसे ही डरी हुई है। यह सरकार अंधेरे में जाना ही नहीं चाहती यानी समस्याओं से बच रही है। यदि आप समाधान चाहते हैं तो समस्याओं के पार जाना होगा।

इस विधेयक का महिला सशक्तीकरण से कोई लेनादेना नहीं

नेता प्रतिपक्ष ने महिला आरक्षण बिल की चर्चा करते हुए कहा कि इस विधेयक का महिला सशक्तीकरण से कोई लेनादेना नहीं है, 2023 में जो विधेयक इस सदन में पारित हुआ था वह महिला आरक्षण का विधेयक था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी भाइयों और बहनों को अधिकार देने से बच रही है। राहुल ने कहा कि इस बिल के जरिए देश का चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश हो रही है। राहुल ने कहा, "ये बिल SC-ST-OBC के खिलाफ है और उनके अधिकार छीनने की कोशिश है।" उन्होंने ये भी कहा कि यह विधेयक भारत की महिलाओं के पीछे छिपकर देश के चुनावी मानचित्र को बदलने का प्रयास है। विपक्ष की मंशा का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, ठपूरा विपक्ष सरकार के इस प्रयास (महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों) को गिराने जा रहा है।"

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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