बंगाल में कार्यक्रम स्थल बदलने पर राष्ट्रपति मुर्मू ने उठाए सवाल, PM मोदी बोले- TMC सरकार ने पार कीं हदें
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल में अपने कार्यक्रम स्थल को बदले जाने को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार की तरफ से कोई भी उनके स्वागत के लिए भी नहीं आया। इस बात को लेकर प्रधानमंत्री ने भी नाराजगी जाहिर की है।

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रोपद्री मुर्मू ने उनके कार्यक्रम स्थल में किए गए बदलाव पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने शुक्रवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी 'छोटी बहन' बताया और हैरानी जताई कि क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री किसी बात को लेकर 'नाराज' हैं, क्योंकि उत्तर बंगाल दौरे के दौरान उनका स्वागत करने के लिए न तो मुख्यमंत्री आईं और न ही कोई अन्य मंत्री मौजूद था। राष्ट्रपति के इस बयान को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने भी ममता बनर्जी सरकार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
सिलीगुड़ी के पास बिधाननगर में आदिवासियों की एक सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राज्य सरकार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी मेरी 'छोटी बहन' जैसी हैं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। मुझे नहीं पता कि वह नाराज हैं या नहीं। खैर, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप सब ठीक रहें।" उन्होंने आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम के आयोजन स्थल को बिधाननगर से गोशाईपुर स्थानांतरित किए जाने पर भी सवाल उठाया, जहां कथित तौर पर लोगों की उपस्थिति कम रही। उन्होंने कहा कि अगर यह कार्यक्रम बिधानगर में आयोजित किया जाता, तो बेहतर होता।
उन्होंने कहा, "वहां पर्याप्त जगह है और कई लोग शामिल हो सकते थे। लेकिन मुझे नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी। आज का कार्यक्रम ऐसी जगह पर हो रहा है, जहां लोगों का आना मुश्किल है। शायद राज्य सरकार आदिवासियों का कल्याण नहीं चाहती और इसलिए उन्हें यहां आने से रोका गया।"
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि स्थानीय आदिवासी समुदाय ने अपने वार्षिक कार्यक्रम के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित किया था। यह कार्यक्रम मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर में ही आयोजित किया जाना था, लेकिन राज्य अधिकारियों ने सुरक्षा और अन्य व्यवस्था संबंधी कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया।
शनिवार को जब राष्ट्रपति वहां पर पहुंची, तो वहां पर केवल कुछ ही लोग मौजूद थे। इसके अलावा प्रोटोकॉल के विपरीत राष्ट्रपति के स्वागत के लिए भी वहां पर कोई मौजूद नहीं था, केवल सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब वहां आए हुए थे। राष्ट्रपति के अनुसार, राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए आमतौर पर मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री उपस्थित होता है।
पीएम मोदी ने जताई नाराजगी
राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू के कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने भी राज्य सरकार पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया साइट पर लिखा कि राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए ममता सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था जिम्मेदार है। उन्होंने लिखा, "यह शर्मनाक है, जो भी लोग लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखते हैं, वह इससे बेहद निराश हैं। राष्ट्रपति जी, जो स्वयं एक आदिवासी समुदाय से आती हैं, द्वारा व्यक्त किया गया दर्द और पीड़ा भारत के लोगों के मन में गहरी उदासी पैदा कर गया है।"
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने वास्तव में सारी सीमाएँ पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनकी प्रशासनिक व्यवस्था जिम्मेदार है। यह भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को पश्चिम बंगाल सरकार इतनी लापरवाही से ले रही है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और इस पद की गरिमा का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी में बेहतर समझदारी कायम होगी।"


