महिला आरक्षण विधेयक पेश करने की तैयारी में सरकार, NDA को कैसे मिलेगा दो तिहाई बहुमत?
NDA in Lok Sabha: केंद्र में सरकार बनने के बाद मोदी सरकार के सबसे अहम एजेंडों में शामिल महिला आरक्षण विधेयक को जल्द लागू करने के बीते सत्र के फैसले को लोकसभा में लगे झटके को लेकर सरकार काफी गंभीर है।

संसद के मॉनसून सत्र में सरकार के विधायी कामकाज में महिला आरक्षण विधेयक फिर से शामिल हो सकता है। बीते सत्र में इस विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक को दो तिहाई समर्थन न मिल पाने के कारण सरकार को पीछे हटना पड़ा था। सरकार के पास राज्यसभा में तो ज्यादा समस्या नहीं है, लेकिन लोकसभा का अंकगणित साधने की चुनौती है। इसके लिए सरकार के प्रबंधकों ने द्रमुक से अनौपचारिक चर्चाओं के साथ एनसीपी (शरद पवार) सहित कुछ अन्य छोटे दलों को साधना भी शुरू किया है।
केंद्र में सरकार बनने के बाद मोदी सरकार के सबसे अहम एजेंडों में शामिल महिला आरक्षण विधेयक को जल्द लागू करने के बीते सत्र के फैसले को लोकसभा में लगे झटके को लेकर सरकार काफी गंभीर है। अब सरकार मॉनसून सत्र में इसे पारित कराने की तैयारी में है ताकि विरोधी दल खासकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया जा सके। जरूरी संख्या बल हासिल करने के लिए वह विपक्षी खेमे को साध रही है।
द्रमुक की कांग्रेस से दूरी अहम कारक
तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रमुक का गठबंधन टूटने के बाद भाजपा लगातार द्रमुक के संपर्क में है। द्रमुक के 22 सांसद हैं। बीते सत्र में उसने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक का विरोध किया था। अब हालात बदल गए हैं और द्रमुक भी कांग्रेस को झटका देने के लिए सरकार की मदद कर सकती है। मुक ने संकेत दिए हैं कि वह सत्र के दौरान ही अपनी रणनीति साफ करेगी कि विपक्ष में रहते हुए वह किस तरह की भूमिका अपनाए।
सपा की शर्तों को लेकर भी कयास
द्रमुक के साथ समाजवादी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में महिलाओं को साधने के लिए अब सरकार के सामने विधेयक के लिए शर्तें रखने लगी है। इसे वर्ष 2027 के राज्य विधानसभा चुनाव में ही लागू करने के साथ राज्यसभा में भी लागू करने और आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, सपा को भी उत्तर प्रदेश में अपनी ताकत बढ़ानी है और उसका इस समय लक्ष्य विधानसभा चुनाव और अपनी सरकार बनाने की कोशिश है न कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता।
शिंदे के कक्ष में गए शरद पवार
इस बीच सरकार ने एनसीपी (शरद पवार) को भी साधना शुरू किया है। हाल में महाराष्ट्र विधानसभा में शरद पवार का उप मुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के कक्ष में पहुंचना और अपने विधायकों के साथ बैठक करना महज संयोग नहीं है।
इस रणनीति पर भी हो सकता है काम
एक सोच यह भी है कि अगर सपा और द्रमुक दोनों मतदान से दूर रहें तो सदन की प्रभावी संख्या 484 रह जाएगी और दो तिहाई का आंकड़ा 320 पर आ जाएगा। द्रमुक के विरोध में रहने पर भी अगर सपा मतदान से दूर रहती है तो भी दो तिहाई का आंकड़ा 333 होगा और तब सरकार एनसीपी, जेएमएम,आप को साधकर आंकड़ा हासिल कर सकती है।
दो तिहाई बहुमत के कई फॉर्मूले
लोकसभा के अंकगणित के अनुसार, 543 की संख्या वाले सदन में दो तिहाई बहुमत के लिए 360 का आंकड़ा चाहिए। सरकार को बीते सत्र में इस विधेयक पर 298 सांसदों का समर्थन मिला था। यानी 62 सांसदों का समर्थन और चाहिए। इस बीच तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों ने पाला बदल लिया है। वह सरकार के साथ हैं। यानी सरकार के समर्थन का आंकड़ा 324 हो गया है। अब यदि द्रमुक उसका किसी तरह साथ देती है तो उसके 22 सांसदों के साथ आंकड़ा 346 हो जाएगा। भाजपा की नजर शरद पवार के आठ, जेएमएम के तीन और आम आदमी पार्टी के तीन सांसदों पर भी है। यानी इन 14 सांसदों का समर्थन मिला तो बिना सपा के भी संख्या 360 हो जाएगी।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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