कांग्रेस की ना-नुकुर के बीच प्रतिभा पाटिल का महिला आरक्षण को समर्थन, पीएम को लिखा पत्र

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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महिला आरक्षण कानून पर कांग्रेस की ना-नुकुर के बीच देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम का खुला समर्थन किया है। जानें इस पत्र के क्या हैं सियासी मायने।

कांग्रेस की ना-नुकुर के बीच प्रतिभा पाटिल का महिला आरक्षण को समर्थन, पीएम को लिखा पत्र

महिला आरक्षण कानून यानी 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के ऐतिहासिक कदम को देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का मजबूत और खुला समर्थन मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर इस पहल की जमकर सराहना की है। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह पत्र बेहद अहम माना जा रहा है। दरअसल प्रतिभा पाटिल का यह समर्थन ऐसे समय में आया है, जब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस कानून की समय-सीमा और अन्य तकनीकी पहलुओं जैसे परिसीमन और कोटा को लेकर लगातार ना-नुकुर कर रही है। 11 अप्रैल को पुणे स्थित अपने आवास 'रायगढ़' से लिखे गए इस पत्र में पूर्व राष्ट्रपति ने इस कानून को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक 'परिवर्तनकारी कदम' करार दिया है।

लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक कदम

प्रतिभा पाटिल ने अपने पत्र की शुरुआत में ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम के ऐतिहासिक क्रियान्वयन के लिए अपनी हार्दिक सराहना व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि यह संवैधानिक संशोधन विधायी निकायों में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करके भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

देश की पहली महिला राष्ट्रपति होने के नाते उन्होंने अपने अनुभवों को शेयर करते हुए लिखा, "मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि वास्तविक महिला सशक्तिकरण तभी हासिल किया जा सकता है जब महिलाओं को उन निर्णयों को आकार देने के समान अवसर प्रदान किए जाएं, जो राष्ट्र को प्रभावित करते हैं।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि यह लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और एक अधिक प्रगतिशील भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प की पुष्टि है। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की उपस्थिति से विधायी बहसों में विविधता आएगी और नीतियां अधिक संतुलित व संवेदनशील बनेंगी।

ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

पूर्व राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह प्रगतिशील पहल अनगिनत महिलाओं, विशेषकर ग्रामीण और हाशिए के समुदायों से आने वाली महिलाओं की आकांक्षाओं को जगाएगी। यह उन्हें राष्ट्र-निर्माण में नेतृत्व करने के लिए प्रेरित करेगा।

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सियासी मायने: कांग्रेस के लिए क्या है संदेश?

प्रतिभा पाटिल की मूल राजनीतिक पृष्ठभूमि कांग्रेस की रही है और वे यूपीए के कार्यकाल में ही राष्ट्रपति चुनी गई थीं। वर्तमान में जहां कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाती रही है और इसके तुरंत लागू न होने या ओबीसी आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रही है, वहीं पार्टी की ही एक वयोवृद्ध नेता और देश के सर्वोच्च पद पर रह चुकीं प्रतिभा पाटिल का प्रधानमंत्री मोदी को यह पत्र लिखना सरकार के लिए एक बड़ा नैतिक समर्थन है। पत्र के अंत में, उन्होंने दशकों पुराने इस सपने को हकीकत में बदलने वाले सभी नेताओं और हितधारकों की सराहना की है।

महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, संसद में टकराव के आसार

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर इस सप्ताह होने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले मंगलवार को सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया। कांग्रेस ने इस कदम की मंशा पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने उस पर अतीत में महिलाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। देश की महिलाओं के नाम लिखे पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यदि 2029 में लोकसभा और विभिन्न विधानसभा चुनाव पूरी तरह महिला आरक्षण लागू होने के साथ कराए जाते हैं, तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत एवं जीवंत बनेगा। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएंगी, तो 'विकसित भारत' की यात्रा को और मजबूती मिलेगी।

इस बीच, दक्षिण भारत के दो प्रमुख गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों- तमिलनाडु के एम.के. स्टालिन और तेलंगाना के ए. रेवंत रेड्डी ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र पर हमला तेज कर दिया। स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि तमिलनाडु के साथ कोई अन्याय हुआ तो "व्यापक आंदोलन" होगा, जबकि रेड्डी ने इसे अन्याय बताया।

रेड्डी ने प्रधानमंत्री को खुले पत्र में सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की और कहा कि केवल जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों में वृद्धि करने से देश के संघीय संतुलन पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों के लिए यह 'अनुपात आधारित मॉडल' स्वीकार्य नहीं होगा और बिना उनकी चिंताओं को दूर किए आगे बढ़ने पर व्यापक विरोध होगा। उन्होंने आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन से मिलकर सामूहिक रणनीति बनाने की भी अपील की। वीडियो संदेश में स्टालिन ने कहा कि यदि परिसीमन के जरिये उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत असंतुलित तरीके से बढ़ाई गई, तो तमिलनाडु में जोरदार विरोध प्रदर्शन होंगे।

लोकसभा सीटों की संख्या 850 करने की तैयारी

महिला आरक्षण कानून को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने के लिए परिसीमन करके लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है। संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे के अनुसार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगी।

सरकार द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक सांसदों के बीच साझा किए जाने के बाद कांग्रेस ने कहा कि यदि किसी विधेयक की मंशा 'भ्रामक' हो, तो उससे संसदीय लोकतंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, "जब किसी विधेयक की नीयत और उसकी सामग्री दोनों संदिग्ध हों, तो लोकतंत्र को भारी नुकसान होता है।" वहीं, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने प्रधानमंत्री के इस कदम को "ऐतिहासिक" बताते हुए समर्थन दिया। 16 से 18 अप्रैल तक संसद का तीन-दिवसीय विशेष सत्र आहूत किया है, जिसमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन लाकर 2029 से इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ किया जाएगा।

(इनपुट एजेंसी)

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