Bihar Exit Polls: प्रशांत किशोर का बिहार चुनाव में बुरा हाल, सच होगी फर्श पर रहने वाली बात

Bihar Exit Polls: प्रशांत किशोर का बिहार चुनाव में बुरा हाल, सच होगी फर्श पर रहने वाली बात

संक्षेप:

बात पीके के जनसुराज की करें तो उसे महज 5 सीटें ही मिल सकती हैं। इसी तरह पी-मार्क एजेंसी के सर्वे में जनसुराज को सिर्फ 1 से 4 तक ही सीटें मिलने की बात है। Peoples Pulse के सर्वे में जनसुराज के शून्य से 5 सीटों तक ठहरने का अनुमान लगाया है। फिलहाल नतीजों का इंतजार है।

Nov 11, 2025 07:35 pm ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जनसुराज के नेता प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव में जोर-शोर से प्रचार किया था। बीते तीन सालों से बिहार में ही मेहनत कर रहे प्रशांत किशोर विधानसभा चुनाव में फेल होते दिख रहे हैं। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में उन्हें जीरो दिया गया है या फिर हद से हद 5 सीटें ही जीतने का अनुमान है। Matrize के सर्वे में एनडीए को 147-167 सीटें मिलने की बात है तो वहीं महागठबंधन 70-90 सीटें पा सकता है। अब बात पीके के जनसुराज की करें तो उसे महज 5 सीटें ही मिल सकती हैं। इसी तरह पी-मार्क एजेंसी के सर्वे में जनसुराज को सिर्फ 1 से 4 तक ही सीटें मिलने की बात है। Peoples Pulse के सर्वे में जनसुराज के शून्य से 5 सीटों तक ठहरने का अनुमान लगाया है।

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एग्जिट पोल्स के नतीजों में प्रशांत किशोर हर जगह मात खाते दिख रहे हैं। दैनिक भास्कर ने उन्हें एक भी सीट नहीं दी है। इसके अलावा पीपल्स इनसाइट के मुताबिक वे हद से हद दो सीटें पा सकते हैं। यदि ये एग्जिट पोल्स सही रहे तो प्रशांत किशोर को चुनावी राजनीति के शुरुआती सालों में ही यह करारा झटका लगेगा। हालांकि वह चुनाव प्रचार के दौरान ही कह चुके हैं कि या तो हम अर्श पर होंगे या फिर फर्श पर रहेंगे। यानी उनका मानना था कि या तो जनसुराज काफी ज्यादा सीटें जीतेगी या फिर दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं होगा। अब सर्वे में दूसरी बात सही साबित होती दिख रही है।

तीन साल से बिहार की खाक छान रहे हैं पीके

बता दें कि 2022 के 2 अक्तूबर को प्रशांत किशोर ने जनसुराज की शुरुआत की थी। तब से अब तक तीन साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है। कोसी और गंगा में काफी पानी बह चुका है, लेकिन प्रशांत किशोर की सियासी नाव ज्यादा आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। ऐसे आंकड़े उनकी सियासी पारी के लिए एक सबक होंगे। अब तक वह एक सफल चुनावी रणनीतिकार के तौर पर पहचान रखते रहे हैं। लेकिन खुद पार्टी बनाकर चुनाव में उतरना एक अलग अनुभव रहा है। रोजगार, सुरक्षा और शिक्षा जैसे मसलों पर उन्होंने आक्रामक प्रचार किया था।

प्रशांत किशोर क्यों लग सकता है झटका, क्या कहते हैं विश्लेषक

जानकार मानते हैं कि यदि चुनाव में ध्रुवीकरण हुआ होगा तो फिर ज्यादातर मतदाता भाजपा, आरजेडी या फिर जेडीयू को ही चुनेंगे। ऐसी स्थिति में प्रशांत किशोर को झटका लगेगा, लेकिन यदि किसी एक पक्ष की लहर नहीं रही तो फिर पीके भी अच्छी संख्या में सीटें पा सकते हैं। फिलहाल प्रशांत किशोर, तेजस्वी या नीतीश कुमार की वास्तव में क्या हालत होगी। उसके लिए 14 नवंबर को आने वाले नतीजों तक इंतजार करना होगा।

Surya Prakash

लेखक के बारे में

Surya Prakash
दुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। करियर की शुरुआत प्रिंट माध्यम से करते हुए बीते करीब एक दशक से डिजिटल मीडिया में हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क के इंचार्ज हैं। और पढ़ें
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