यूपी में 'बाटी-चोखा' पर क्यों छिड़ी 'जंग', भाजपा हुई नाराज तो अखिलेश यादव ने दी ग्रैंड दावत

Jan 02, 2026 06:52 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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सपा प्रमुख का यह बयान भाजपा के उन ब्राह्मण विधायकों और विधान पार्षदों (MLCs) के समर्थन में माना जा रहा है, जिन्हें हाल ही में एक ऐसी ही दावत में शामिल होने के लिए अपनी ही पार्टी से चेतावनी मिली थी।

यूपी में 'बाटी-चोखा' पर क्यों छिड़ी 'जंग', भाजपा हुई नाराज तो अखिलेश यादव ने दी ग्रैंड दावत

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों जायके और जाति का एक अनोखा मेल देखने को मिल रहा है। नए साल के पहले दिन समाजवादी पार्टी (सपा) के मुख्यालय में आयोजित 'बाटी-चोखा' की दावत ने राज्य में एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। यह दावत सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रहे 'ब्राह्मण बनाम संगठन' विवाद पर कटाक्ष के रूप में देखी जा रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए साल के अवसर पर आयोजित इस भोज में शामिल कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "बाटी-चोखा हमारे प्रदेश की संस्कृति का हिस्सा है, इसे आपसी झगड़ों और राजनीति में बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। सभी को बिना किसी पाबंदी के एक साथ बैठकर भोजन करना चाहिए।"

सपा प्रमुख का यह बयान भाजपा के उन ब्राह्मण विधायकों और विधान पार्षदों (MLCs) के समर्थन में माना जा रहा है, जिन्हें हाल ही में एक ऐसी ही दावत में शामिल होने के लिए अपनी ही पार्टी से चेतावनी मिली थी। सपा सूत्रों के अनुसार, इस भोज का मकसद सत्तारूढ़ दल को यह संदेश देना था कि खाने-पीने और सामाजिक मेलजोल पर किसी भी तरह की जातिगत बंदिश गलत है।

क्या है पूरा विवाद?

इस सियासी दावत की पटकथा लगभग एक सप्ताह पहले लिखी गई थी। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी के कई ब्राह्मण विधायकों और एमएलसी को चेतावनी जारी की थी। ये नेता पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोकप्रिय व्यंजन 'बाटी-चोखा' के बहाने आयोजित एक सामुदायिक बैठक और डिनर में शामिल हुए थे। भाजपा ने इसे जाति आधारित गतिविधि और अनुशासनहीनता के तौर पर देखा था। हालांकि, पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह जैसे नेताओं ने अपनी ही पार्टी के इस रुख का विरोध करते हुए कहा था कि जब दल खुद जाति सम्मेलन करते हैं, तो विधायकों के साथ बैठने पर आपत्ति क्यों है।

जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव ने 'बाटी-चोखा' के जरिए दो निशाने साधे हैं। भाजपा के भीतर जो ब्राह्मण नेता संगठन की सख्ती से नाराज हैं, उनके प्रति सहानुभूति दिखाकर सपा उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। वहीं, बाटी-चोखा पूर्वी यूपी की पहचान है। इसके जरिए सपा खुद को आम जनता की परंपराओं के करीब और भाजपा को कठोर दिखाने की कोशिश कर रही है।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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