
तीन घंटे तक कार में बैठा रहा उमर नबी, फिर दहलाई दिल्ली; बड़े सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस
संक्षेप: दिल्ली पुलिस और NIA अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि विस्फोटकों से भरी यह कार फरिदाबाद तक कैसे पहुंची, और क्या इसके पीछे किसी बड़े आतंकी नेटवर्क या सीमा पार से जुड़ा षड्यंत्र था।
देश की राजधानी में हुए सोमवार शाम के भीषण कार विस्फोट की जांच में सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक की सबसे सिहरन भरी कहानी जोड़ ली है। जांचकर्ताओं ने उस सफेद हुंडई i20 कार की 11 घंटे की पूरी यात्रा का खाका तैयार किया है, जो अंततः लाल किले के पास धमाके के साथ खत्म हुई। प्रारंभिक जांच में यह आत्मघाती हमला होने की आशंका जताई गई है। इस विस्फोट में अब तक कम से कम 13 लोगों की मौत और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कार जम्मू-कश्मीर के पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन नबी चला रहा था। माना जा रहा है कि उसने ही इस हमले को अंजाम दिया। सीसीटीवी फुटेज से खुलासा हुआ है कि मुख्य संदिग्ध डॉक्टर मोहम्मद उमर उर्फ उमर नबी ने धमाके से ठीक पहले अपनी हुंडई आई-20 कार में करीब तीन घंटे तक इंतजार किया। यह रहस्यमयी इंतजार अब जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है- क्या वह किसी बड़े संकेत का इंतजार कर रहा था? या फिर रेकी का हिस्सा था यह प्लान?

फरिदाबाद से लाल किला तक की यात्रा
सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, सोमवार सुबह 7:30 बजे कार को फरिदाबाद के एशियन हॉस्पिटल के पास देखा गया। लगभग 45 मिनट बाद, वह बदरपुर टोल प्लाजा से दिल्ली में प्रवेश करती दिखी। फुटेज में एक व्यक्ति मास्क लगाए स्टीयरिंग पर बैठा हुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
इसके बाद कार ओखला औद्योगिक क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप पर रुकी, जहां उसने ईंधन भरवाया। इसके बाद लगभग छह घंटे तक कार का कोई सुराग नहीं मिला। फिर दोपहर 3:20 बजे, वह कार लाल किले के सामने स्थित एक पार्किंग में दाखिल होती दिखी।
एक वरिष्ठ जांच अधिकारी ने बताया कि करीब तीन घंटे तक ड्राइवर कार के अंदर ही बैठा रहा, उसने एक बार भी बाहर कदम नहीं रखा। वह शायद किसी संकेत या सही समय का इंतजार कर रहा था।
धमाके से कुछ देर पहले की गतिविधि
शाम 6:22 बजे, कार पार्किंग से निकलकर नेताजी सुभाष मार्ग पर मुड़ी- वही सड़क जो लाल किले के ठीक सामने से गुजरती है। 6:52 बजे, यानी सिर्फ 30 मिनट बाद, कार ट्रैफिक सिग्नल के पास भीषण धमाके के साथ फट गई।
धमाका इतना जबरदस्त था कि कार के परखच्चे उड़ गए और आसपास खड़े करीब 15 वाहन- जिनमें छह कारें और दो ई-रिक्शा शामिल हैं वे भी आग की लपटों में घिर गए। सड़क पर शरीर के अंग बिखर गए और मौके पर अफरातफरी मच गई।
उच्च तीव्रता वाले विस्फोटक का इस्तेमाल
फोरेंसिक टीम और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने घटनास्थल से विस्फोटक के अवशेष और वाहन के टुकड़े जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि धमाके में उच्च तीव्रता वाला विस्फोटक प्रयोग किया गया, जिसे कार के भीतर से ट्रिगर किया गया था।
2900 किलो विस्फोटक बरामदगी से जुड़ा लिंक
दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे की जांच में इस हमले को फरिदाबाद में हाल ही में बरामद किए गए 2,900 किलो विस्फोटक, असॉल्ट राइफल, पिस्तौल और IED बनाने की सामग्री से जोड़ दिया है। यह बरामदगी जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान 8 से 10 नवंबर के बीच हुई थी, जिसमें तीन डॉक्टरों सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
फरार था उमर, गिरफ्तारी से पहले ही विस्फोट
खुफिया सूत्रों के अनुसार, डॉ. उमर उन नबी भी इसी व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क का हिस्सा था। अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद वह अंडरग्राउंड हो गया था। जांचकर्ताओं को संदेह है कि गिरफ्तारी के डर से घबराकर उसने अंततः विस्फोटक कार को खुद ही उड़ा दिया।
बड़े सवाल, उलझी जांच
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपे गए इस मामले में अब जैश-ए-मोहम्मद का कनेक्शन जुड़ रहा है। फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़े तीन अन्य डॉक्टरों समेत आठ लोग पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। पुलिस के सामने ये बड़े सवाल हैं:
तीन घंटे का रहस्य: पार्किंग में कार खड़ी करने के बाद उमर कहां था? किससे मिला या संपर्क किया? क्या यह रेकी का हिस्सा था?
विस्फोटक का स्रोत: इतनी बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट कहां से आया? क्या यह अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा है?
ब्रेन का खेल: उमर के साथी पकड़े जा चुके थे, फिर भी उसने हाई-सिक्योरिटी जोन में रिस्क क्यों लिया?
एनआईए, आईबी, यूपी एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम फरीदाबाद से पुलवामा तक फैली इस साजिश की परतें खोल रही है।
आगे की जांच
दिल्ली पुलिस और NIA अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि विस्फोटकों से भरी यह कार फरिदाबाद तक कैसे पहुंची, और क्या इसके पीछे किसी बड़े आतंकी नेटवर्क या सीमा पार से जुड़ा षड्यंत्र था।
अधिकारियों का कहना है कि यह हमला राष्ट्रीय प्रतीकों को निशाना बनाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियां अब दिल्ली और एनसीआर के सभी प्रमुख स्थलों की सुरक्षा समीक्षा में जुट गई हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह हमला सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है कि डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षित युवाओं के बीच छिपे ‘वाइट कॉलर टेरर नेटवर्क’ को समय रहते खत्म करना जरूरी है।





