पुलिस क्वार्टर बेच दी, अब क्या हाईकोर्ट की बिल्डिंग बेचोगे? किस बात पर भड़क गए जज

Himanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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High Court News: सरकारी रिकॉर्ड में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट भी भी कथित मालिक के नाम पर ही है। अभियोजन पक्ष यानी कि पुलिस और सरकारी वकील के पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि यह जमीन पुलिस विभाग की है।

पुलिस क्वार्टर बेच दी, अब क्या हाईकोर्ट की बिल्डिंग बेचोगे? किस बात पर भड़क गए जज

Karnataka High Court News: कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु में पुलिसकर्मियों के आवास पुलिस क्वार्टर वाली जमीन पर एक व्यक्ति द्वारा मालिकाना हक जताने और उसे बेचने के मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर इस तरह के दावों को मान लिया जाए तो आने वाले समय में हाईकोर्ट की इमारत भी सुरक्षित नहीं रहेगी। यह मामला शिवमोगा के रहने वाले श्रीनाथ नगरगद्दे से जुड़ा है, जो बेंगलुरु के पुलिस क्वार्टर की जमीन को कथित रूप से बेचने के एक आपराधिक मामले में आरोपी हैं।

सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने जमीन पर अपने मुवक्किल के मालिकाना हक की बात कही और पुलिस के वहां रहने को अनधिकृत बताया तो कोर्ट भड़क गया। जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा, "इसीलिए मैं कह रहा था कि अगर इस तरह की चीजों की अनुमति दी गई तो हाईकोर्ट की इमारत भी सुरक्षित नहीं है। आपकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी। आप पुलिस क्वार्टर ही बेच देते हैं! आपने उस क्वार्टर को बेच दिया जो पिछले 15 साल से पुलिस विभाग के पास है और जहां पुलिसकर्मी रह रहे हैं।"

जब वरिष्ठ वकील एम. अरुण श्याम ने मामले को टालने या राहत देने का अनुरोध किया तो कोर्ट ने कहा, "क्या यह पुलिस क्वार्टर बेचने का मामला है? जांच चल रही है। इसे चलने दीजिए। मैं इस मामले को मेरिट के आधार पर देखूंगा और खुद इसका जवाब दूंगा।"

‘1950 से हमारे नाम पर हैं दस्तावेज’

आरोपी श्रीनाथ नगरगद्दे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम. अरुण श्याम ने दलील दी कि यह जमीन एक अन्य आरोपी एम.आर. महालक्ष्मी की है। महालक्ष्मी ने इस संपत्ति पर अपना मालिकाना हक होने का दावा करते हुए कुछ लोगों के साथ बिक्री समझौता किया था, जिन्हें अब इस आपराधिक मामले में आरोपी बनाया गया है।

सरकारी रिकॉर्ड में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट भी भी कथित मालिक के नाम पर ही है। अभियोजन पक्ष यानी कि पुलिस और सरकारी वकील के पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि यह जमीन पुलिस विभाग की है। आपको बता दें कि साल 1950 से लगातार जमीन के रिकॉर्ड आरोपी नंबर 1 और उनके पूर्वजों के नाम पर दर्ज हैं।

वकील श्याम ने कोर्ट के सामने यह चुनौती भी रखी कि अगर राज्य सरकार जमीन के मालिकाना हक का एक भी दस्तावेज पेश कर दे तो उनके मुवक्किल अपना केस वापस ले लेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस जमीन को लेकर दो दीवानी मुकदमे पहले से लंबित हैं, जिनमें पुलिस भी एक पक्ष है।

1930 से पुलिस के कब्जे में है जमीन

इस याचिका का विरोध करते हुए अतिरिक्त विशेष लोक अभियोजक बीएन जगदीशा ने कोर्ट को बताया कि इस जमीन पर पुलिस विभाग का कब्जा बेहद पुराना है। उन्होंने कहा, "यह जमीन साल 1930 से पुलिस स्थापना के पास है और लगातार उनके ही कब्जे में रही है। इसके बाद विभाग ने इस जमीन पर पुलिसकर्मियों के रहने के लिए आधिकारिक तौर पर क्वार्टर का निर्माण किया था।"

आरोपी के वकील ने यह भी दलील दी कि इस मामले में केवल उन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जिन्होंने जमीन खरीदने का समझौता किया था, जबकि मुख्य विक्रेता के खिलाफ पुलिस वैसी कार्रवाई नहीं कर रही है। पुलिस ने दूसरी जगह शिकायत दर्ज कर एग्रीमेंट होल्डर्स को गिरफ्तार कर लिया है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई को स्थगित कर दिया और अगली सुनवाई के लिए 9 जून की तारीख तय की है।

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लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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