PoK न तो 'आज़ाद', न ही 'विवादित'; स्थानीय लोगों ने PAK प्रोपेगेंडा कर दिया फुस्स! उड़ी शरीफ-मुनीर की नींद
पाक अधिकृत कश्मीर पिछले 40 दिनों से धधक रहा है। इस बीच, विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एक प्रमुख नेता ने खुले तौर पर इस्लामाबाद के उस रुख को खारिज कर दिया जिसमें इस क्षेत्र को आजाद कश्मीर कहता आ रहा था।

पश्चिमी पड़ोसी देश पाकिस्तान दशकों से पूरी दुनिया की आंखों में धूल झोंकता आ रहा था और यह प्रोपेगेंडा फैलाता आ रहा था कि उसके द्वारा अधिकृत कश्मीर यानी PoK 'आज़ाद कश्मीर' है लेकिन स्थानीय नेताओं ने पाकिस्तान के इस मुखौटे को उतार दिया है और पाक प्रोपेगेंडा की खाल उतार दी है। रावलकोट में एक बड़ी रैली के दौरान, विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एक प्रमुख नेता ने खुले तौर पर इस्लामाबाद के रुख को खारिज कर दिया। वहां ईदगाह मैदान में उमड़े 80,000 से ज्यादा लोगों के जनसैलाब के सामने आंदोलनकारी नेता सरदार अमान खान ने ऐसा सच बोला है, जिससे इस्लामाबाद के हुक्मरानों खासकर पाक पीएम शहबाज शरीफ और पाक सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर की नींद उड़ गई है।
खान ने दहाड़ते हुए ऐलान किया कि यह इलाका न तो "आज़ाद" है और न ही "विवादित", बल्कि यह पूरी तरह से पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला इलाका है। जन समूह को संबोधित करते हुए, खान ने PoK पर पाकिस्तान के दशकों पुराने नैरेटिव पर सीधे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यह कोई विवादित इलाका नहीं है... यह कब्ज़े वाला इलाका है... इस पर कब्ज़ा किया गया है।" उनकी इस बात पर लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं और नारे लगाए।
गोलियों की गूँज और भूख की तड़प
दरअसल, PoK पिछले 40 दिनों से सुलग रहा है। पाकिस्तानी हुकूमत ने यहाँ के लोगों की आवाज़ दबाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। ताजा संघर्षों में छह नागरिकों की हत्या कर दी गई है। आलम यह है कि पिछले तीन हफ्तों से भोजन और दवाओं की सप्लाई रोककर इस पूरे इलाके में कृत्रिम मानवीय संकट खड़ा कर दिया गया है। PoK में इंटरनेट बंद है, पुलिस महिलाओं और बच्चों पर बर्बरता कर रही है, और लोग अपनी ही जमीन पर कैद होकर रह गए हैं।
स्थानीय लोग पाकिस्तानी अधिकारियों पर इलाके में हालात खराब करने का आरोप लगा रहे हैं। खान ने भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने पिछले तीन हफ़्तों से खाने-पीने की चीज़ों और दवाओं की सप्लाई रोक दी है, जिससे मानवीय संकट पैदा हो गया है। उन्होंने लाइन ऑफ कंट्रोल के दोनों ओर के लोगों और भारत से भी समर्थन की अपील की है। बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, हजारों प्रदर्शनकारी लाइन ऑफ़ कंट्रोल के पास जमा हुए थे और जोर देकर कहा था कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है।
भारत से मदद की गुहार
रैली में माहौल तब और गरमा गया जब अमान खान ने भीड़ से पूछा, "क्या हमें लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) की तरफ मार्च करना चाहिए?" जवाब में हज़ारों की भीड़ एक सुर में चिल्लाई, "LoC की तरफ बढ़ो!" सरदार अमान खान ने दो-टूक कहा कि पाकिस्तान को इस इलाके की जरूरत अपनी रोटियाँ सेकने के लिए है, लेकिन यहाँ की जनता को पाकिस्तान की कोई ज़रूरत नहीं है। उन्होंने खुलेआम भारत और LoC के उस पार रहने वाले कश्मीरी भाइयों से मदद की अपील की है।
भारत की क्या प्रतिक्रिया?
PoK में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर भारत ने पाकिस्तान की आलोचना की है। मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने एक बयान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की आलोचना की और कहा कि ये झड़पें "सिस्टमैटिक शोषण" (लगातार और सुनियोजित शोषण) का नतीजा हैं। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "PoJK में चल रहे विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध और जबरन कब्ज़े वाले इलाकों में दशकों से किए जा रहे सिस्टमैटिक शोषण, बुनियादी अधिकारों से वंचित रखने और प्रशासनिक दमन का सीधा नतीजा हैं।" विदेश मंत्रालय ने ज़रूरी सामान की सप्लाई रोकने, पुलिस की बर्बरता और इंटरनेट बंद करने के लिए पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की।
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लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


