
ये मुस्लिम मुल्क इतना क्यों खास? जहां तीसरी बार जा रहे PM मोदी; जाकिर नाइक पर भी बड़ा अपडेट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरी बार 2015 में मलेशिया का दौरा किया था, जब दोनों देशों ने अपने संबंधों को एक बेहतर रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुँचाया था। उनकी यह तीसरी मलेशिया यात्रा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 और 8 फरवरी को दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश मलेशिया के आधिकारिक दौरे पर जा रहे हैं। यह यात्रा मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर हो रही है और ऐसे समय में हो रही है, जब भारत–मलेशिया संबंध एक नए रणनीतिक दौर में प्रवेश कर चुके हैं। प्रधानमंत्री की मलेशिया की यह तीसरी यात्रा है और 2024 में मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की भारत यात्रा के बाद यह पहली यात्रा है। पीएम मोदी की यह मलेशिया यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने आखिरी बार 2015 में मलेशिया का दौरा किया था, जब दोनों देशों ने अपने रिश्तों को बेहतर रणनीतिक साझेदारी (Enhanced Strategic Partnership) तक उन्नत किया था। इसके बाद अगस्त 2024 में अनवर इब्राहिम की भारत यात्रा के दौरान संबंधों को और आगे बढ़ाते हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) का दर्जा दिया गया।
इस दौरे के दौरान दोनों नेता अगस्त 2024 में शुरू हुई इस साझेदारी के तहत प्रगति की समीक्षा करेंगे और भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार करेंगे। इस यात्रा के दौरान PM मोदी के मलेशियाई नेताओं से मिलने और वहां रह रहे भारतीय समुदाय को संबोधित करने की भी उम्मीद है। विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, यह दौरा भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें वह दक्षिण-पूर्व एशिया और ASEAN क्षेत्र के साथ अपने रिश्तों को मज़बूत करने पर जोर दे रहा है।
मोदी–अनवर वार्ता: किन मुद्दों पर रहेगी नजर?
भारत और मलेशिया के बीच 'व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते' (CECA) की संयुक्त समीक्षा पर चर्चा होने की उम्मीद है ताकि द्विपक्षीय व्यापार को और अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाया जा सके। वर्तमान में मलेशिया आसियान (ASEAN) क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है,जिसका द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर है। इसके अलावा दोनों देश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक बहुस्तरीय सहयोग व्यवस्था स्थापित करने पर काम कर रहे हैं, जो इस दौरे का एक प्रमुख परिणाम हो सकता है
बातचीत के प्रमुख एजेंडे
दोनों नेता व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करेंगे। इस दौरे के दौरान कुआलालंपुर में भारत-मलेशिया CEO फोरम की 10वीं बैठक भी होगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख क्षेत्रों के प्रमुख मलेशियाई CEOs के साथ बातचीत करेंगे। वह मलेशिया में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे, जिनकी संख्या लगभग 29 लाख है।
डिजिटल भुगतान पर समझौते की संभावना
यात्रा के दौरान रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें आपदा प्रबंधन और संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा सहयोग (UN Peacekeeping) जैसे क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। स्टार्टअप और नवाचार में साझेदारी पर भी दोनों नेता बात करेंगे। MEA ने साफ किया है कि भारत दोनों देशों के बीच व्यापार को संतुलित और दीर्घकालिक दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है। इस यात्रा के दौरान भारत की 'नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन' (एनपीसीआई) द्वारा डिजिटल भुगतान पर एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है जिसे मुख्य उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण पर भी चर्चा
भारत ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान वांछित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की जायेगी। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) पी कुमारन ने प्रधानमंत्री की मलेशिया यात्रा की जानकारी देने के लिए गुरुवार को बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन में जाकिर नाइक के प्रत्यप्रर्ण से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि यात्रा के दौरान सभी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्यर्पण के विषय पर पहले भी अलग-अलग मंच पर और अलग अलग स्तर पर बातचीत हुई है । उन्होंने कहा कि इससे संबंधित तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने तक भारत इस मुद्दे को उठाता रहेगा और उम्मीद है कि वांछित परिणाम मिलेंगे।
क्यों अहम है यह दौरा?
यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक कूटनीतिक दौरा नहीं, बल्कि भारत की Act East Policy को मज़बूती, ASEAN क्षेत्र में रणनीतिक मौजूदगी, टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग और लोगों से लोगों के रिश्तों को और गहरा करने का प्रयास होगा। कुल मिलाकर, पीएम मोदी का मलेशिया दौरा भारत–मलेशिया रिश्तों को रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक—तीनों मोर्चों पर नई ऊर्जा देने वाला माना जा रहा है। (एजेंसी इनपुट्स के साथ)

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




