कांग्रेस ने अपने पाप को सही ठहराने के लिए बापू को आगे किया, क्या बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, 'दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने देश के उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालियापन को भी एक्सपोज कर दिया है।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचाना है और इस बढ़ते आत्मविश्वास की वजह से विकसित देश भी व्यापार समझौते के लिए आगे आ रहे हैं। पीएम मोदी ने न्यूज-18 राइजिंग भारत सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के बाद भी कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिए औपनिवेशिक मानसिकता को बरकरार रखा। उन्होंने कहा, 'यदि हमने अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचान कर अपने संस्थानों को मजबूत न किया होता, तो कोई भी देश हमारे साथ व्यापार समझौते नहीं करता। इसी कारण विकसित देश भारत के साथ व्यापार समझौते करने के लिए आगे आए हैं।'
PM नरेंद्र मोदी ने कहा, 'AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालियापन को भी एक्सपोज कर दिया है।' उन्होंने कहा कि जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। कांग्रेस ने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है।
देश के भविष्य को लेकर क्या कहा
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी देश में क्षमता अचानक नहीं आती बल्कि यह पीढ़ियों से निर्मित होती है। यह ज्ञान, परंपरा, कड़ी मेहनत और अनुभव से निखरती है। पीएम मोदी ने कहा कि इतिहास के लंबे कालखंड में सदियों की गुलामी ने देश की क्षमता के प्रति हीनता की भावना को भर दिया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में इस धारणा को गहराई से बैठा दिया था कि भारतीय अशिक्षित और अधीन हैं।
2014 से पहले के दौर का जिक्र
पीएम मोदी ने कहा, 'अगर देश अब भी 2014 से पहले के युग की निराशा में डूबा हुआ होता, कमजोर 5 देशों में गिना जाता और नीतिगत गतिरोध से ग्रस्त होता, तो हमारे साथ व्यापार समझौता कौन करता?' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'पिछले 11 वर्षों में देश की चेतना में ऊर्जा का एक नया प्रवाह प्रवाहित हुआ है। भारत अब अपनी खोई हुई क्षमता को फिर से प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है।'


