सांसदों को लेटर लिखकर याद दिलाएं; PM मोदी ने देश की करोड़ों महिलाओं से क्या मांगा
पीएम नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण को लेकर देश भर की महिलाओं के नाम एक खुला खत लिखा है। उन्होंने कहा कि मुझे करोड़ों माताओं और बहनों का आशीर्वाद चाहिए। पीएम मोदी ने इस दौरान भीमराव आंबेडकर को भी याद किया और कहा कि यह विधेयक उनकी ही भावना को आगे बढ़ाने वाला है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर देश भर की महिलाओं के नाम खुला पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल को संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा होने जा रही है। इसके लिए मैं देश भर की करोड़ों महिलाओं से आशीर्वाद चाहता हूं। इसके अलावा उन्होंने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को भी याद किया है और कहा कि महिला आरक्षण उनकी विचारधारा को ही आगे बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि मैं बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता हम सभी के लिए बहुत प्रेरणादायक है।
इसके आगे वह लिखते हैं कि संविधान ने हमें जिस समानता और समरसता भावना का मार्ग दिखाया है, हम सर्वोच्च मानवता पर चलते हुए 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा होने जा रही है। संसद के आगामी सत्र में यह संवैधानिक संशोधन पारित हो, इसके लिए मैं आप सभी, विशेषकर देशभर की करोड़ों माताओं-बहनों का आशीर्वाद चाहता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि पूरा सदन मिलकर इस ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन को पारित करेगा और विधायी संस्थाओं में देश की नारी शक्ति की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। मैं देख रहा हूँ कि इसे लेकर हर तरफ जोर और उत्साह का माहौल है। देशभर की माताएं और बहनें इस बात पर खुशी जता रही हैं कि उन्हें विकसित भारत के निर्माण में, देश की नीतियों के निर्माण में और अधिक मजबूती से अपना योगदान देने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिलाओं के आरक्षण के साथ होते हैं तो हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत और सशक्त बनेगी। इसके लिए संसद में आने वाले विधेयक का पारित होना बेहद जरूरी है। इसमें किसी भी तरह की देरी दुर्भाग्यपूर्ण होगी और यह देश की नारी शक्ति के साथ अन्याय होगा। देश की बेटियों को उनके इस अधिकार के लिए अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं करना पड़े। विधायी संस्थाओं में नारी शक्ति की आवाज ज्यादा सशक्त होगी। मुझे विश्वास है कि आप भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन को संसद में पारित होने की प्रतीक्षा कर रही हैं।
सांसदों को पत्र लिखें महिलाएं, बोलें- सत्र में हिस्सा लें
मेरा विनम्र आग्रह है कि आप अपने स्थानीय सांसद को पत्र लिखकर संसद के इस ऐतिहासिक सत्र में हिस्सा लेने के लिए उनका उत्साह बढ़ाएं। उन्हें याद दिलाएं कि वे कुछ ऐसा करने जा रहे हैं, जिसे सदियों तक याद किया जाएगा। इससे उनका योगदान देश के इतिहास में दर्ज होगा। मैं इस अवसर पर आप सभी को देने वाले सभी त्योहारों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मेरी कामना है कि आप सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आए।
भारत में आजादी मिलते ही महिला और पुरुष बने मतदाता
भारत के स्वतंत्र होते ही महिलाओं और पुरुषों को मतदान का समान अधिकार मिला। वहीं, दुनिया के कई अन्य देशों में महिलाओं को यह अधिकार पाने के लिए वर्षों, यहां तक कि सदियों तक इंतजार करना पड़ा। पिछले तीन-चार दशकों में विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए गए, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं रहे। कुछ अवसर तो ऐसे आए जब हम लक्ष्य पाने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन फिर भी हम सफल नहीं हो सके। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस विषय पर सदन सहमत रही, वह आज तक अपने तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया है।
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