संसद का मानसून सत्र खत्म; वंदे मातरम के बाद लोकसभा स्थगित; घंटे भर चली राज्यसभा में एक बिल पास
संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राष्ट्रगीत वंदे मातरम बजने के तत्काल बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। घंटे भर चली राज्यसभा में एक बिल पास हुआ।

संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राष्ट्रगीत बजने के तत्काल बाद स्पीकर ओम बिड़ला ने सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। लोकसभा चार मिनट से भी कम समय तक चली और अगले सत्र तक स्थगित हो गई। विपक्ष के हंगामा के बीच राज्यसभा में घंटे भर काम चला, जिसमें खनन के कानून को राज्यों के लिए कड़ा करने वाला संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पास हुआ। राज्यसभा में विधायी कार्यों के बीच उत्तराखंड के हल्द्वानी में अपने एक कार्यक्रम के बाद सभास्थल के शुद्धिकरण का मामला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उठाया, जिस पर बवाल हुआ। सरकार की तरफ से जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार जांच करवाएगी, लेकिन इस मसले पर राजनीति नहीं हो। खरगे ने सदन से बाहर दलित अपमान का मसला उठाया था और कहा था कि वहां मेरे लौटने के बाद हवन की क्या जरूरत थी।
लोकसभा सत्र खत्म होने के बाद सभी दलों के नेताओं के स्पीकर ओम बिड़ला से मुलाकात की चर्चा है। सुबह कहा जा रहा था कि विपक्ष तैयार हो जाए तो सरकार मानसून सत्र बढ़ाने के लिए तैयार है। लेकिन अब जब दोनों सदनों में मानसून सत्र का औपचारिक समापन हो गया है तो विशेष सत्र बुलाने पर ही आगे सहमति बनाने की कोशिश हो सकती है। 20 जुलाई को शुरू हुए मानसून सत्र के पहले ही दिन छात्र आंदोलन के संसद मार्च पर लाठीचार्ज के बाद 19 दिन तक सदन चलाने की कोशिश कामयाब नहीं हुई। विपक्ष लाठीचार्ज को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से दो टूक पूछ रहा था कि लाठी और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया। अमित शाह ने बुधवार को इस मसले पर पहली बार सामने आकर कहा था कि विपक्ष सदन चलने दे, वह जवाब देने के लिए तैयार हैं। लेकिन, लोकसभा में आज ऐसा नहीं हो सका।
राज्यसभा में सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सत्र के आखिरी दिन हंमागा के बीच सदन को घंटे भर चला गए। खरगे के अपमान पर हंगामा के बाद जब नड्डा ने बयान दे दिया और फिर खुद सभापति ने छुआछूत के खिलाफ सदन की भावना को रखा तो माहौल शांत हुआ। उसके बाद खनन के संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू हुई जो राज्य सरकारों द्वारा खनन पर अतिरिक्त कर, शुल्क, सेस वगैरह लगाने पर रोक लगाती है। अब खनिज और खदान पर किसी तरह का टैक्स वसूलने से पहले राज्यों को केंद्र से मंजूरी लेनी होगी। सभापति ने इस बिल पर सबसे पहले टीएमसी सांसद सागरिका घोष को बोलने कहा, लेकिन वह अमित शाह के सदन में नहीं आने पर बोलने लगीं तो विषय से बाहर बोलने के आधार पर उनको बिठा दिया गया। खनन के संशोधन विधेयक को पक्ष-विपक्ष के सांसदों के बोलने के बाद हंगामा के बीच ध्वनिमत से पास कर दिया गया। सभापति ने सत्र को स्थगित करने से पहले सांसदों को बताया कि इस सत्र में सदन मात्र 37 घंटे 49 मिनट चला।


