छोटा सत्र गले के लिए अच्छा, सपा सांसद के सवाल पर पीएम मोदी ने ली ऐसी चुटकी; लगे जोरदार ठहाके
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इस बार का शीतकालीन सत्र बहुत छोटा था। इसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह गले के लिए अच्छा है। ज्यादा दिन चिल्लाना ठीक नहीं है।

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के नेता एक दूसरे पर तीखे हमले करते हुए दिखाई दिए। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में महौल गर्म ही बना रहा। वहीं विपक्ष ने जी राम जी योजना और इंडिगो संकट को लेकर जमकर हंगामा किया। हालांकि शुक्रवार को शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद दोनों पक्षों के नेता चाय पर चर्चा के लिए हंसते-मुस्कुराते इकट्ठे हुए। इस चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी आमने-सामने बैठे दिखाई दिए। दोनों ने हल्की-फुल्की बातें करते हुए चाय का लुत्फ लिया। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने यह चाय पार्टी दी थी।
तस्वीरों में देखा जा सकता है कि प्रियंका गांधी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बगल में बैठी हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसी बात पर वह मुस्कुरा रही हैं। प्रियंका गांधी इस समय केरल की वायनाड सीट से सांसद हैं। उन्होंने कहा कि वह मलयालम सीखने की कोशिश कर रही हैं। इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीका और मध्य एशिया के उन देशों को लेकर चर्चा की जहां वह हाल ही में होकर आए हैं।
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी इस यात्रा के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि एथियोपिया काफी अलग देश है। यहां के लोग तेजी से विकास कर रहे हैं और उनका समाज भी बहुत अच्छा है। समाजवादी पार्टी नेता धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इस बार शीत सत्र बहुत छोटा था। इसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुटकी लेते हुए जवाब दिया कि यह गले के लिए अच्छा है। उन्होंने कहा कि ज्यादा दिन चिल्लाना बहुत मुश्किल हो जाता। इसके बाद हॉल ठहाकों से गूंज उठा।
इस चाय पर चर्चा में एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले, डीएमके के ए राजा, केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू, जेडीयू के राजीव रंजन सिंह, चिराग पासवान और अन्य कई नेता मौजूद थे। बता दें कि हर बार सत्र खत्म होने के बाद इस तरह की मीटिंग होती है। बजट सेशन के बाद विपक्ष ने इस मीटिंग का बहिष्कार कर दिया था। शुक्रवार को शीतकाली सत्र का आखिरी दिन था। इस बार यह सत्र 19 दिन चला। इसमें 92 घंटे और 25 मिनट की बैठक हुई और इसकी उत्पादकता 111 फीसदी बताई गई है।

लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
और पढ़ें



