पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करना होगा, वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दें: PM मोदी
PM मोदी ने कहा कि कोरोना के समय में वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंस की व्यवस्थाएं विकसित कीं और उसकी आदत भी हो गई थी। आज समय की मांग ऐसी है कि उन व्यवस्थाओं को हम फिर से शुरू करें तो वह देशहित में होगा।

तेलंगाना में रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल-डीजल का कम से कम इस्तेमाल करने की अपील की। साथ ही, वर्क फ्रॉम होम, कार पूल, मेट्रो के इस्तेमाल और ऑनलाइन मीटिंग्स को प्राथमिकता देने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि इस समय भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। पिछले दो महीने से हमारे पड़ोस में ही इतना बड़ा युद्ध चल रहा है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। भारत पर गंभीर असर हुआ है। भारत के पास बड़े-बड़े तेल के कुएं नहीं हैं। हमें अपनी जरूरत का पेट्रोल-डीजल, गैस दुनिया के दूसरे देशों से मंगाना पड़ता है।
पीएम मोदी ने कहा, ''युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल, गैस के दाम बहुत अधिक बढ़ चुके हैं। सरकार दो महीने से संकट से बचाने के लिए प्रयास कर रही है। सारा बोझ अपने कंधे पर उठा रही है, लेकिन जब सप्लाई चेन पर संकट लगातार बना रहे तो कितने ही उपाय कर लें, मुश्किलें बढ़ती ही जाती हैं। अब हमें एकजुट होकर लड़ना होगा। संकट के इस समय में कुछ संकल्प लेने होंगे और उन्हें पूरे समर्पण भाव से पूरा करना होगा। जैसे पेट्रोल-डीजल का संयम से इस्तेमाल करना।''
उन्होंने आगे कहा, ''पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करना होगा। शहरों में जहां मेट्रो है, वहां तय करें कि हम मेट्रो का ही इस्तेमाल करेंगे। ज्यादा से ज्यादा मेट्रो से ही जाएंगे, अगर कार में ही जाना जरूरी है तो कार पूल करने का प्रयास करें और भी लोगों को साथ बैठा लें। कहीं सामान भेजना हो तो कोशिश करनी है कि ज्यादा से ज्यादा रेलवे गुड्स की जो ट्रेन होती है, उससे भेजें, ताकि इलेक्ट्रिक रेलवे होने के कारण पेट्रोल-डीजल की जरूरत नहीं पड़ती है। जिन लोगों के पास ईवी कार हैं, वे उसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।''
पीएम मोदी ने आगे कहा कि कोरोना के समय में वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंस की व्यवस्थाएं विकसित कीं और उसकी आदत भी हो गई थी। आज समय की मांग ऐसी है कि उन व्यवस्थाओं को हम फिर से शुरू करें तो वह देशहित में होगा। वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉनफ्रेंसेस, वर्चुअल मीटिंग्स को फिर से प्राथमिकता देनी है। आज जो संकट है, उसमें हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर भी बहुत जोर देना होगा।''
'सालभर तक नहीं खरीदें सोना'
विदेशी मुद्रा बचाने के जो भी रास्ते हम अपना सकते हैं, उन्हें बचाना होगा। सोने की खरीद एक और पहलू है, जिसमें विदेशी मुद्रा बहुत अधिक खर्च होती है। एक जमाना था, जब संकट आता था, कोई युद्ध होता था तो लोग देशहित में सोना दान दे देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन देशहित में हमको यह तय करना पड़ेगा कि सालभर तक कोई भी फंक्शन हो, कोई भी कार्यक्रम में हो, सोना नहीं खरीदेंगे। सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए विदेशी मुद्रा को बचाना होगा।
लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
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