पूर्वोत्तर का पहला ग्रीनफील्ड चार लेना वाला हाई स्पीड कॉरिडोर, पीएम मोदी ने रखी नींव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सिलचर में लगभग 23,550 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की नींव रखी है। 66 किलोमीटर लंबे शिलांग-सिलचर कॉरिडोर की आधारशिला भी रखी गयी। यह पूर्वोत्तर का पहला एक्सेस-नियंत्रित, ग्रीनफ़ील्ड और चार-लेन वाला हाई-स्पीड कॉरिडोर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दक्षिणी असम के सिलचर में लगभग 23,550 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उनका उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य बराक घाटी और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में संपर्क को बढ़ावा देना, कृषि शिक्षा को मज़बूत करना और बुनियादी ढांचे के विकास में तेज़ी लाना है। इन परियोजनाओं की शुरुआत कछार ज़िले के सिलचर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान की गई। इसमें प्रधानमंत्री ने कई बड़ी बुनियादी ढांचागत पहलों के लिए भूमि पूजन भी किया। पीएम मोदी शुक्रवार को राज्य के दो दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी पहुँचे थे।
शिलॉन्ग-सिलचर कॉरिडोर
यहां आयोजित हुए कार्यक्रम में 166 किलोमीटर लंबे शिलांग-सिलचर कॉरिडोर की आधारशिला भी रखी गयी। यह पूर्वोत्तर का पहला एक्सेस-नियंत्रित, ग्रीनफ़ील्ड और चार-लेन वाला हाई-स्पीड कॉरिडोर है। लगभग 22,860 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे मेघालय के शिलांग को असम के सिलचर से जोड़ेगा। यह गलियारा गुवाहाटी और सिलचर के बीच की यात्रा के समय को करीब साढ़े आठ घंटे से घटाकर लगभग पाँच घंटे कर देगा।
इस कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि ये परियोजनाएं इस क्षेत्र में सपंर्क मज़बूत करेंगी और कृषि शिक्षा में सुधार लाएंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश और व्यापार नीति में पूर्वोत्तर के बढ़ते महत्व पर भी प्रकाश डाला। पीएम मोदी ने कहा, "आज, पूर्वोत्तर देश की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के केंद्र में है। यह भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाले एक सेतु के रूप में उभर रहा है।"
पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए बड़ी सड़क परियोजना
प्रधानमंत्री ने यहां कैपिटल पॉइंट के पास ट्रंक रोड से लेकर रंगिरखारी पॉइंट तक, राष्ट्रीय राजमार्ग 306 पर बनने वाले एक एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए भी भूमि पूजन किया। उम्मीद है कि यह परियोजना शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक पर भीड़भाड़ को कम करेगी और मिज़ोरम, त्रिपुरा और मणिपुर जैसे पड़ोसी राज्यों से आवाजाही में सुधार करेगी, साथ ही बराक घाटी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी।
पीएम मोदी ने करीमगंज ज़िले के पाथरकांडी में एक नए कृषि महाविद्यालय की आधारशिला रखी। यह संस्थान दक्षिणी असम में कृषि शिक्षा के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाएगा, और बराक घाटी तथा आस-पास के क्षेत्रों के छात्रों को कृषि में उच्च शिक्षा तक बेहतर पहुँच प्रदान करेगा।
इस क्षेत्र में किसानों और बागान श्रमिकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि असम के विकास में उनका योगदान बहुत खास रहा है। उन्होंने कहा, "बराक घाटी के किसानों और यहाँ के चाय बागान के श्रमिकों ने असम के विकास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है।" प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों और गाँवों के विकास के महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "हम सीमा पर बसे गाँवों को देश का पहला गाँव मानते हैं।" "इसलिए, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए, 'वाइब्रेंट विलेजेज़ प्रोग्राम' का अगला चरण कछार ज़िले से ही शुरू किया गया। इससे यह भी सुनिश्चित हुआ है कि बराक घाटी के कई गाँवों में सुधार देखने को मिलेगा।"
प्रधानमंत्री मोदी ने 'असम माला 3.0' का भूमि पूजन भी किया। यह 3,200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली एक प्रमुख सड़क बुनियादी ढांचा परियोजना है। इस पहल के तहत पूरे असम में 900 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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