
दबाव में आने वालों में से नहीं हैं पीएम मोदी, अमेरिका से तनातनी पर बोले पुतिन
Vladimir Putin in India: भारत दौरे का आगाज करने जा रहे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी दबाव में आने वाले नेताओं में से नहीं है।
भारत दौरे का आगाज करने जा रहे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी दबाव में आने वाले नेताओं में से नहीं है। खास बात है कि उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका रूस का नाम लेकर भारत के खिलाफ टैरिफ वॉर चला रहा है। अमेरिका की तरफ से भारत पर रूसी तेल की खरीद बंद करने का दबाव बनाया जा रहा है।
इंडिया टुडे से बातचीत में पुतिन ने कहा कि मोदी 'दबाव में आने वालों में से नहीं हैं।' साथ ही उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व की भी तारीफ की है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया ने भारत का अडिग रुख देखा है। पुतिन ने जानकारी दी है कि भारत और रूस के बीच 90 प्रतिशत द्विपक्षीय लेनदेन पूरे हो चुके हैं। भारत रूसी तेल का बड़ा खरीददार रहा है।
पुतिन की भारत यात्रा
गुरुवार को पीएम मोदी रूसी राष्ट्रपति पुतिन के सम्मान में एक डिनर की मेजबानी करेंगे। पुतिन की यात्रा ऐसे वक्त हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। रूसी राष्ट्रपति के गुरुवार शाम लगभग साढ़े चार बजे नयी दिल्ली पहुंचने की संभावना है और उनकी यात्रा का मकसद समग्र द्विपक्षीय रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को विस्तार देना है।
मोदी और पुतिन के बीच शुक्रवार को होने वाली शिखर वार्ता में रक्षा सहयोग बढ़ाने, द्विपक्षीय व्यापार को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखने और छोटे ‘मॉड्यूलर रिएक्टर’ के क्षेत्र में संभावित सहयोग पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। माना जा रहा है इस वार्ता पर पश्चिमी देशों की पैनी निगाह रहेगी। भारत और रूस के बीच 23वीं शिखर वार्ता के बाद दोनों पक्ष व्यापार समेत कई क्षेत्रों में समझौते कर सकते हैं।
चूंकि रूसी नेता यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए नए सिरे से अमेरिकी प्रयास के बीच भारत की यात्रा पर आ रहे हैं, इसलिए शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे पर भी बातचीत होने की संभावना है।
शिखर वार्ता में भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की बड़ी मात्रा में खरीद के कारण बढ़ते व्यापार घाटे का मुद्दा उठाए जाने की संभावना है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाए जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में संभवत: अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। इस शुल्क में रूसी कच्चे तेल की खरीद के कारण लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है।
रूस के राष्ट्रपति के कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि पश्चिमी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद में 'कुछ समय के लिए' गिरावट आ सकती है, लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि मॉस्को आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है।





