BRICS समिट के आखिरी सत्र में पीएम मोदी ने किस बात पर जताई चिंता, होर्मुज पर भी कर दिया इशारा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खनिजों का उपयोग हथियार बनाने और भू-राजनीतिक तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने होर्मुज की ओर इशारा करके कहा कि तनाव से आम आदमी भी दिक्कत में आ जाता है।

PM Modi
ब्रिक्स के आखिरी सत्र में पीएम मोदी ने युद्ध को लेकर जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चेताया कि प्रौद्योगिकी और दुर्लभ खनिजों को रणनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल न किया जाए। इससे साझा प्रगति और समृद्धि की राह में बाधा पैदा हो सकती है। इसलिए हमने प्रौद्योगिकी को अपनाने में समावेशिता पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आखिरी सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी मौजूद रहे।

भारत के प्रयास चार स्तंभों पर केंद्रित

मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने अपने प्रयासों को चार स्तंभों लचीलापन, नवाचार, सहयोग और वहनीयता पर केंद्रित किया है। हम अपनी साझा सोच को ऐसी स्थिति में बदलने में सफल रहे हैं, जिसमें सभी पक्षों को लाभ हो।

तनाव से आम लोगों पर असर

प्रधानमंत्री ने भू-राजनीतिक तनाव और दुनियाभर में आम लोगों के जीवन पर इसके बुरे असर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव का आम लोगों के जीवन पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। महामारियों, जलवायु संबंधी आपदाओं और आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों ने यह साबित किया है कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।

एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली पर सहमति

मोदी ने कहा कि इसके मद्देनजर हमने ब्रिक्स समूह के भीतर लचीलापन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। यह भी उतना ही जरूरी है कि चुनौतियों की समय रहते पहचान की जाए, उनके लिए तैयार रहा जाए और तत्काल कार्रवाई की जाए। इसी दृष्टिकोण के तहत संक्रामक रोगों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को लेकर आम सहमति बनी है। इससे जुड़े आंकड़ों को एकीकृत करने की व्यवस्था के लिए दिशा-निर्देश भी तैयार किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स लॉजिस्टिक आपूर्ति शृंखला सहयोग ढांचा हमारी आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक विश्वसनीय और मजबूत बनाने में मदद करेगा। इसी तरह नवाचार के क्षेत्र में ‘ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क’ हमारे स्टार्टअप और ‘इनक्यूबेटर्स’ को आपस में जोड़ेगा। बता दें कि इनक्यूबेटर से मतलब ऐसे संस्थानों या संगठनों से है जो नए स्टार्टअप को शुरुआती दौर में मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता, विशेषज्ञ सलाह, संसाधन और निवेश से जुड़ने में मदद करते हैं।

स्टार्टअप इनोवेशन फंड का प्रस्ताव: सम्मेलन के दौरान भारत ने नए और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड का भी प्रस्ताव रखा। प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल कृषि के जरिये किसानों के लिए नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस पहल में एआई, जियोस्पेशियल तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाएगा।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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