Hindi NewsIndia NewsPiyush Goyal Amid Tension with America and Trade Deal says With a Gun Our Head We
हमारे सिर पर बंदूक रखकर... अमेरिका से तनाव के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कह दी बड़ी बात

हमारे सिर पर बंदूक रखकर... अमेरिका से तनाव के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कह दी बड़ी बात

संक्षेप:

गोयल की यह टिप्पणी रूस से तेल खरीद बंद करने के लिए भारत पर अमेरिका द्वारा बनाए जा रहे दबाव को देखते हुए महत्वपूर्ण है। ट्रंप पिछले एक हफ्ते में कई बार यह दावा कर चुके हैं कि भारत रूस से तेल खरीद बंद करने के लिए राजी है।

Fri, 24 Oct 2025 10:44 PMMadan Tiwari पीटीआई, वॉशिंगटन
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अमेरिका से टैरिफ और ट्रेड डील पर जारी तनाव के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बड़ी बात कही कि भारत जल्दबाजी में या किसी तरह के दबाव में आकर व्यापार समझौते नहीं करता है। उन्होंने कहा कि हम कोई समयसीमा या हमारे सिर पर बंदूक तानकर कोई समझौता नहीं करते हैं। गोयल ने कहा कि भारत की यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका सहित विभिन्न देशों एवं समूहों के साथ व्यापार समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत जारी है। गोयल ने जर्मनी में आयोजित ‘बर्लिन संवाद’ में कहा, ‘‘हम यूरोपीय संघ के साथ सक्रिय बातचीत कर रहे हैं। हम अमेरिका से भी बात कर रहे हैं लेकिन हम जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करते और न ही कोई समयसीमा या हमारे सिर पर बंदूक तानकर कोई समझौता करते हैं।’’

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री इस संवाद कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए बर्लिन में हैं। यह द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए नेताओं और जर्मन व्यवसायों की एक बैठक। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापार समझौते को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। गोयल ने कहा कि भारत कभी भी जल्दबाजी या उकसावे में आकर कोई निर्णय नहीं लेता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका में लगाए गए उच्च सीमा शुल्क से निपटने के लिए नए बाजारों की तलाश कर रहा है।

भारत के साथ दीर्घकालिक निष्पक्ष व्यापार समझौता शर्तों पर किए जाने के सवाल पर गोयल ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि भारत ने कभी भी राष्ट्रीय हित के अलावा किसी अन्य आधार पर यह निर्णय लिया है कि उसके मित्र कौन होंगे। यदि कोई मुझसे कहता है कि आप यूरोपीय संघ के मित्र नहीं हो सकते, तो मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगा या कोई कल मुझसे कहता है कि मैं केन्या के साथ काम नहीं कर सकता, तो यह भी स्वीकार्य नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि किसी देश से कोई भी विशेष उत्पाद खरीदने का निर्णय पूरी दुनिया का होगा। गोयल ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘मैं आज के अखबार में पढ़ रहा था कि जर्मनी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट मांग रहा है...ब्रिटेन ने पहले ही अमेरिका से तेल खरीदने के लिए छूट हासिल करने का तरीका तलाश लिया है या शायद उसे छूट मिल भी गई है...तो फिर भारत को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है।’’

गोयल की यह टिप्पणी रूस से तेल खरीद बंद करने के लिए भारत पर अमेरिका द्वारा बनाए जा रहे दबाव को देखते हुए महत्वपूर्ण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले एक हफ्ते में कई बार यह दावा कर चुके हैं कि भारत रूस से तेल खरीद बंद करने के लिए राजी है। हालांकि भारत ने इससे इनकार किया है। अमेरिका ने 22 अक्टूबर को रूस के दो सबसे बड़े कच्चे तेल उत्पादकों रॉसनेफ्ट और ल्यूकऑयल पर प्रतिबंध लगा दिए और सभी अमेरिकी संस्थाओं एवं लोगों को उनके साथ व्यापार करने से रोक दिया।

रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क का जुर्माना लगाया हुआ है। यह अमेरिकी बाजारों में प्रवेश करने वाले भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत के जवाबी शुल्क के अतिरिक्त है। कुल मिलाकर भारतीय सामानों पर अमेरिका में 50 प्रतिशत का आयात शुल्क लग रहा है। भारत ने इन शुल्कों को ‘अनुचित और अविवेकपूर्ण’ बताया है।

गोयल ने कहा कि किसी भी देश को व्यापार समझौतों को अल्पकालिक परिप्रेक्ष्य में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘व्यापार समझौते लंबी अवधि के लिए होते हैं। यह केवल शुल्क या वस्तुओं व सेवाओं तक पहुंच के बारे में नहीं है बल्कि यह विश्वास और संबंधों के बारे में भी है। दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में व्यापार समझौते केवल शुल्क् से कहीं अधिक होते हैं और हमारा ध्यान केवल वर्तमान मुद्दों और शुल्क पर केंद्रित है।’’ भारत और अमेरिका इस साल मार्च से एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इस पर अब तक पांच दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है।

गोयल ने कहा कि ये वार्ताएं आगे बढ़ रही हैं और उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष निकट भविष्य में एक निष्पक्ष एवं न्यायसंगत समझौते की दिशा में काम करेंगे। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक भारतीय आधिकारिक दल पिछले सप्ताह अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ व्यापार वार्ता करने के लिए अमेरिका में था। तीन दिवसीय वार्ता 17 अक्टूबर को संपन्न हुई।

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।

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