SC पहुंचा हिमंता का शूटिंग वीडियो विवाद, Ex LG समेत 12 ने दायर की PIL; 2 अन्य मुख्यमंत्रियों को भी लपेटा

Feb 09, 2026 06:36 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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इस जनहित याचिका को दाखिल करने वालों में पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग के अलावा प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा, जॉन दयाल सहित अन्य लोग शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस गंभीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की है।

SC पहुंचा हिमंता का शूटिंग वीडियो विवाद, Ex LG समेत 12 ने दायर की PIL; 2 अन्य मुख्यमंत्रियों को भी लपेटा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़े कथित ‘शूटिंग वीडियो’ को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग समेत 12 सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा नफरत फैलाने और गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा समेत कई वरिष्ठ मंत्री और राज्यपाल लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जो मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हैं और संविधान द्वारा निर्धारित मूल्यों व मर्यादाओं का उल्लंघन करते हैं।

इस जनहित याचिका को दाखिल करने वालों में पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग के अलावा प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा, जॉन दयाल सहित अन्य लोग शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस गंभीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की है।

हिमंता के अलावा इन लोगों पर भी आरोप

याचिका में दावा किया गया है कि हाल के वर्षों में कई उच्च पदस्थ जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए बयान गंभीर चिंता का विषय हैं। इनमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कथित मुस्लिम-विरोधी बयान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की टिप्पणियाँ और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधानसभा में की गई “कठमुल्ला” संबंधी टिप्पणी का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, याचिका में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे द्वारा मुसलमानों को “पाकिस्तानी पिंप्स” कहे जाने और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से जोड़े गए उस बयान का भी ज़िक्र है, जिसमें युवाओं से “इतिहास का बदला लेने” की बात कही गई थी।

अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकीं

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस तरह के बयान न केवल अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देते हैं, बल्कि देश की संवैधानिक व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करते हैं। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या उच्च पदों पर बैठे लोगों की सार्वजनिक बयानबाज़ी के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाते हैं।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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