सुप्रीम कोर्ट के भी फैसलों की आलोचना करने का लोगों को हक, CJI सूर्यकांत ने ऐसा क्यों कहा

Himanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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डॉ. पंकज पुष्कर की ओर से दाखिल अर्जी में कक्षा आठ की पुरानी सामाजिक विज्ञान की किताब में लिखी इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई गई थी कि हाल के फैसले में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को शहर में अतिक्रमण करने वाला माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के भी फैसलों की आलोचना करने का लोगों को हक, CJI सूर्यकांत ने ऐसा क्यों कहा

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि लोगों को हमारे फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है। शीर्ष अदालत ने एनसीईआरटी की 8वीं कक्षा की पुरानी सामाजिक विज्ञान की किताब से अदालती फैसलों के खिलाफ की गई टिप्पणी को हटाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि किसी फैसले के बारे में अपनी राय जाहिर करना गलत नहीं है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि ‘यह किसी फैसले के बारे में एक राय है। यह एक स्वस्थ आलोचना है। न्यायपालिका को इस बात को लेकर इतना अधिक संवेदनशील क्यों होना चाहिए? किताब का यह हिस्सा बताता है कि न्यायपालिका की बनावट कैसी है, वे कैसे काम करते हैं और क्या-क्या किया है?’

सीजेआई ने कहा कि ‘इसमें उनके कुछ अच्छे कामों को भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, कुछ ऐसे अदालती फैसले भी हैं जिनके बारे में लोगों का मानना है कि वे आम लोगों के सर्वोत्तम हितों के खिलाफ काम करते हैं...यह किसी फैसले के बारे में एक दृष्टिकोण है, लोगों को हमारे फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है।’

एनसीईआरटी के पूर्व सदस्य डॉ. पंकज पुष्कर की ओर से दाखिल अर्जी में कक्षा आठ की पुरानी सामाजिक विज्ञान की किताब में लिखी इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई गई थी कि हाल के फैसले में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को शहर में अतिक्रमण करने वाला माना जाता है।

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका से जुड़े पाठ्य की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई है। सरकार ने कहा है कि विशेषज्ञ समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा, भारत के सरकार के पूर्व अटार्नी जनरल व वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल और भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस शामिल होंगे।

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लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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