अगर वो जीवित होते तो... पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते क्यों भावुक हो गईं महबूबा मुफ्ती?

Jan 07, 2026 07:52 pm ISTPramod Praveen वार्ता, श्रीनगर
share Share
Follow Us on

महबूबा ने हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में दायर अपनी PIL का भी ज़िक्र किया और कहा कि उच्च न्यायालय ने उनसे पूछा कि उन्हें कैद में बंद लोगों की ओर से बोलने का क्या अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर मैं नहीं बोलूंगी तो कौन बोलेगा?

अगर वो जीवित होते तो... पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते क्यों भावुक हो गईं महबूबा मुफ्ती?

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती बुधवार (7 जनवरी) को अनंतनाग जिले के बीजबेहड़ा में दारा शको में पीडीपी संस्थापक और अपने दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की 10वीं पुण्यतिथि पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भावुक हो गईं। भावुक भाव में ही पार्टी कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा कि अगर उनके पिता आज जीवित होते तो जम्मू-कश्मीर की स्थिति ऐसी नहीं होती, क्योंकि उनके पास "दूरदृष्टि और सूझबूझ" थी। इस अवसर पर महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के लिये आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की परिकल्पना को अपनाना है।

उन्होंने सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस पर भी निशाना साधा और उस पर "सत्ता के लिए सौदेबाजी करने" का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीता दशक लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा है। अगर उनके पिता आज जीवित होते तो जम्मू-कश्मीर की स्थिति ऐसी नहीं होती, क्योंकि उनके पास "दूरदृष्टि और सूझबूझ" थी। उन्होंने कहा कि उनके पिता की नीतियां लोगों के हितों की रक्षा के लिए थीं, लेकिन उनके जीवनकाल में उन्हें अक्सर गलत समझा गया।

जम्मू-कश्मीर का मौजूदा माहौल भय से भरा हुआ

महबूबा ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर का मौजूदा माहौल भय से भरा हुआ है, जहां हिरासत और अनिश्चितता के कारण परिवार तबाह हो रहे हैं। उन्होंने लाल किले पर हुए आतंकवादी हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि एक डॉक्टर दिल्ली गया और उसने अपनी जान ले ली। उन्होंने कहा, "कुलगाम में एक पिता ने इसलिए खुद को आग लगा ली क्योंकि उसका बेटा जेल में था। हमारे कई युवा कैद हैं, हज़ारों लोग जम्मू-कश्मीर से बाहर की जेलों में सड़ रहे हैं।"

मैं नहीं बोलूंगी तो कौन बोलेगा?

महबूबा ने हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में दायर अपनी जनहित याचिका (PIL) का भी ज़िक्र किया और कहा कि उच्च न्यायालय ने उनसे पूछा कि उन्हें कैद में बंद लोगों की ओर से बोलने का क्या अधिकार है। उन्होंने कहा, "अगर मैं नहीं बोलूंगी तो कौन बोलेगा? ये गरीब लोग हैं, इनके पास तो यात्रा करने के पैसे भी नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि बंदियों के मुद्दे उठाना उनका नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का दायित्व है। उन्होंने कहा, “उनके पास 50 विधायक हैं, राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य हैं। फिर भी वे सिर्फ पीडीपी को दोष देते हैं।”

उनके पास पूर्ण बहुमत फिर भी चुप बैठे हैं

महबूबा ने कहा, "उनके पास पूर्ण बहुमत है, और उनकी पार्टी के सदस्य राज्यसभा और लोकसभा दोनों में हैं, फिर भी वह उन मुद्दों पर चुप रहते हैं जो गरीबों को नुकसान पहुंचाते हैं... उन्हें नहीं पता कि एक गरीब परिवार के लिए बाग या ज़मीन के टुकड़े का क्या मतलब होता है। इसीलिए वह इन मुद्दों पर चुप हैं और उन लोगों के लिए बोलने से मना करते हैं जिनकी रोज़ी-रोटी दांव पर लगी है।"

मुफ़्ती सईद ने कभी सत्ता के सौदे नहीं किए

पी़डीपी चीफ ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके पिता मुफ़्ती सईद ने कभी सत्ता के सौदे नहीं किए। उन्होंने कहा, “आपने हमेशा सत्ता का व्यापार किया। चाहे वह अफ़ज़ल गुरु की फांसी हो या मक़बूल भट्ट का मामला। मेरे पिता ने कश्मीर को इस दलदल से बाहर निकालने की कोशिश की, जबकि आप सौदे करते रहे। जम्मू-कश्मीर के लिए आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता मुफ़्ती मोहम्मद सईद का विज़न है। वह रास्ता जो कश्मीर को अशांति से बाहर ले जाए।”

Mehbooba Mufti

उन्होंने कहा कि मुफ़्ती सईद ने जम्मू-कश्मीर को "सम्मान और गरिमा" दिलाई। उन्होंने याद दिलाया कि केवल 16 सीटें होने के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित राष्ट्रीय नेता उनसे मिलने आए थे। बाद में जब पीडीपी ने 28 सीटें जीतीं, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेता भी उनसे सलाह लेने पहुंचे। उन्होंने कहा, "उन्होंने उनसे कहा था कि वह कश्मीर को बचाना चाहते हैं, अनुच्छेद 370 को बचाना चाहते हैं, रास्ते खोलना चाहते हैं और लोगों से तथा पाकिस्तान से बात करना चाहते हैं।"

उमर अब्दुल्ला की आलोचना

उन्होंने उमर अब्दुल्ला की आलोचना करते हुए कहा कि आज उनके पास 50 विधायक और तीन सांसद हैं, फिर भी वे दिल्ली से छोटे-मोटे तबादलों की गुहार लगाते हैं, जबकि उनके पिता(मुफ़्ती सईद) ने जम्मू-कश्मीर के लोगों की गरिमा बहाल करने की कोशिश की थी। उन्होंने पुलवामा, शोपियां और पहलगाम से होकर प्रस्तावित रेलवे लाइन परियोजना पर उमर अब्दुल्ला की "चुप्पी" पर भी सवाल उठाया और कहा कि इससे उन बागानों को खतरा है जिन पर बेरोज़गार युवाओं वाले परिवार निर्भर हैं।

उन्होंने कहा, "कोई यह नहीं बोलता कि इससे हमारे बागानों पर क्या असर पड़ेगा। क्या उमर जानते हैं कि हमारे लिए एक बागान का क्या मतलब है? हर घर में कम से कम चार बेरोज़गार युवा हैं जो इन्हीं बागानों पर निर्भर हैं। अगर यह ज़मीन छीन ली गयी तो इन युवाओं का क्या होगा? मैं केंद्र सरकार से पूछना चाहती हूं, अगर आप हर घर के इन चार युवाओं को नौकरी देने के लिए तैयार हैं, तभी लोग अपनी ज़मीन देने को तैयार होंगे।"

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।