शेर आया-शेर आया; जमानत मिलने के बाद दिल्ली पहुंचे पवन खेड़ा, बोले- फैसले से एक संदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पवन खेड़ा ने पत्रकारों से कहा कि बी.आर. अंबेडकर द्वारा बनाया गया संविधान नागरिकों के अधिकारों की रक्षा तब भी करता है, जब कथित तौर पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के जरिए उनका उल्लंघन किया जाता है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रविवार को कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े मानहानि और जालसाजी के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें अग्रिम जमानत दिए जाने के बाद संविधान में उनका विश्वास और मजबूत हुआ है। वह अदालत से जमानत मिलने के बाद दिल्ली पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान, शेर आया-शेर आया के नारे भी लगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खेड़ा ने पत्रकारों से कहा कि बी.आर. अंबेडकर द्वारा बनाया गया संविधान नागरिकों के अधिकारों की रक्षा तब भी करता है, जब कथित तौर पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के जरिए उनका उल्लंघन किया जाता है।
'एक संदेश देता है फैसला'
कांग्रेस नेता ने कहा, "जब भी किसी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन होता है, खासकर तब जब सरकार के तंत्र का दुरुपयोग करके उनका उल्लंघन किया जाता है, तो हर नागरिक को बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान पर इतना विश्वास होना चाहिए कि वह उसकी रक्षा के लिए आगे आएगा। हम सभी के साथ यही हुआ है। यह लगातार हो रहा है। जब सुप्रीम कोर्ट ने मुझे जमानत दी, तो बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान में पूरे देश का विश्वास एक बार फिर बहाल हो गया।" न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए खेड़ा ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक मजबूत संदेश देता है कि विपक्षी नेताओं के लिए भी संवैधानिक सुरक्षा बनी रहती है, और उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायपालिका सरकारों द्वारा किए जा रहे, 'दमनकारी कार्रवाई' के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी।
चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल
उन्होंने संस्थागत जवाबदेही को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि भारतीय चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को अपनी विश्वसनीयता से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। यह जमानत पूरे देश को एक साफ संदेश देती है- जब भी किसी आम नागरिक, यहां तक कि विपक्ष के अधिकारों का उल्लंघन किसी भी सरकार द्वारा किया जाता है, तो बाबा साहेब अंबेडकर का संविधान निश्चित रूप से उनकी रक्षा के लिए आगे आएगा, और यह मेरी रक्षा के लिए भी आगे आया है। मुझे विश्वास है कि केंद्र और कुछ राज्यों में ऐसी दमनकारी सरकारों के खिलाफ एक निर्णायक फैसला आएगा, क्योंकि लोगों के मन में उनके बारे में सवाल हैं। जब भी कोई उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, तो चुनाव आयोग को भी उसका जवाब देना चाहिए।"
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लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
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