बंगाल में सरकारी जमीन पर था BJP ऑफिस, शुभेंदु की पार्टी ने खुद चला दिया बुलडोजर
Bengal BJP Office: सरकारी आदेश के बाद हेमताबाद में शालबागान के पास स्टेट हाईवे के किनारे स्थित बीजेपी के ब्लॉक कार्यालय की मापी कराई गई। जांच में सामने आया कि पार्टी कार्यालय का बरामदा सरकारी जमीन के दायरे में आ रहा था।

Bulldozer in Bengal BJP Office: पश्चिम बंगाल भाजपा नई सरकार के गठन के बाद से ऐक्शन मोड में दिख रही है। उत्तर दिनाजपुर जिले के हेमताबाद से एक बेहद अनोखी तस्वीर सामने आई है। आमतौर पर सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने के दौरान होने वाले भारी विरोध और राजनीतिक ड्रामे के विपरीत यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कानून का पालन करते हुए एक मिसाल कायम की है। 3 जून की दोपहर को जब बीजेपी नेताओं को पता चला कि उनके पार्टी दफ्तर का एक हिस्सा सरकारी जमीन पर बना है तो उन्होंने खुद ही उसे ढहा दिया।
यह पूरा मामला हेमताबाद के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) बिस्वजीत दत्ता द्वारा जारी किए गए एक प्रशासनिक निर्देश के बाद शुरू हुआ। बीडीओ ने इलाके में सरकारी जमीन पर किए गए सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को तुरंत हटाने का आदेश दिया था।
इस आदेश के बाद हेमताबाद में शालबागान के पास स्टेट हाईवे के किनारे स्थित बीजेपी के ब्लॉक कार्यालय की मापी कराई गई। जांच में सामने आया कि पार्टी कार्यालय का बरामदा सरकारी जमीन के दायरे में आ रहा था। इसके तुरंत बाद स्थानीय बीजेपी नेता ने प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय खुद ही उस हिस्से को हटाने का फैसला किया।
खुद हथौड़ा लेकर पहुंचे बीजेपी नेता
बीजेपी के प्रखंड अध्यक्ष बिप्लव सरकार की मौजूदगी में पार्टी कार्यकर्ता खुद हथौड़े, बुलडोजर और अन्य औजार लेकर दफ्तर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने कानून का सम्मान करते हुए खुद ही अपने हाथों से पार्टी दफ्तर के अवैध बरामदे को तोड़ना शुरू किया और देखते ही देखते कुछ ही समय में सरकारी जमीन को पूरी तरह खाली कर दिया। प्रशासन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, कालियागंज के रास्ते दक्षिण दिनाजपुर को जोड़ने वाले राज्य राजमार्ग के दोनों ओर 15 फीट के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों को हटाया जाना अनिवार्य किया गया है।
बीजेपी नेता बिप्लव सरकार ने कहा, "प्रशासन ने आम जनता की सुविधा और सड़क को चौड़ा करने के लिए सड़क के दोनों ओर से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। चूंकि हमारी पार्टी के कार्यालय का बरामदा भी उसी चिन्हित क्षेत्र के भीतर आ रहा था इसलिए हमने कानून का पालन करते हुए खुद ही उस हिस्से को ध्वस्त कर दिया। हम सरकार से यह भी उम्मीद और अपील करते हैं कि इस अभियान के कारण प्रभावित होने वाले स्थानीय छोटे दुकानदारों के पुनर्वास की उचित व्यवस्था की जाए।"
दुकानदारों ने भी खुद हटाए अतिक्रमण
बीजेपी कार्यकर्ताओं के इस कदम का स्थानीय लोगों और व्यापारियों पर भी सकारात्मक असर देखने को मिला। रायगंज-बालुरघाट राज्य राजमार्ग के किनारे स्थित कई दुकानदारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के मालिकों ने भी प्रशासन की जेसीबी का इंतजार किए बिना, सरकारी जमीन पर बने अपने अवैध काउंटरों, शेड और दुकानों के हिस्सों को खुद ही हटाना शुरू कर दिया।
हेमताबाद के बीडीओ बिस्वजीत दत्ता ने बताया कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है, बल्कि इसके लिए बकायदा पहले से तैयारी की गई थी। उन्होंने कहा, "हम पिछले कई दिनों से लाउडस्पीकर के जरिए जागरूकता संदेश देकर और नोटिस जारी कर लोगों को सरकारी जमीन खाली करने की सूचना दे रहे थे। हमने अब आधिकारिक तौर पर बेदखली अभियान शुरू कर दिया है। इसके बाद भी अगर सरकारी जमीन पर कोई भी अवैध निर्माण पाया जाता है तो प्रशासन उसे कड़ाई से ध्वस्त कर देगा।"
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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