FCRA संशोधन विधेयक 2026 के लिए संसदीय समिति घोषित, निशिकांत दुबे, कल्याण बनर्जी शामिल

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विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक (FCRA), 2026 के लिए प्रस्तावित  संयुक्त संसदीय समिति का गठन कर दिया गया है। इसमें भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और तेजस्वी सूर्या समेत कुल 31 सांसदों को शामिल किया गया है।

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FCRA विधेयक के लिए संयुक्त संसदीय समिति का ऐलान

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान चर्चा का केंद्र बने ‘विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक (FCRA), 2026’ के लिए प्रस्तावित संयुक्त संसदीय समिति का गठन कर दिया गया है। इस समिति में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और तेजस्वी सूर्या का नाम भी शामिल है। पहले से प्रस्तावित इस समिति में कुल 31 सदस्य हैं। इनमें से 21 सदस्य लोकसभा सांसद हैं, जबकि 10 सदस्य राज्यसभा के सदस्य हैं। अब यह समिति इस विधेयक की धाराओं की विस्तार से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट को लोकसभा के पटल पर रखेगी। इसमें लोकसभा सांसद संजय जायसवाल को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है।

लोकसभा से इन 21 सांसदों को मिली जगह-

  1. डॉ. संजय जायसवाल
  2. भृतहरि महताब
  3. तेजस्वी सूर्या
  4. कमलेश जांगड़े
  5. मुकेश कुमार चंद्रकांत दलाल
  6. निशिकांत दुबे
  7. विष्णु दयाल राम
  8. अनंत नायक
  9. अरविंद धर्मपुरी
  10. एंटो एंटोनी
  11. कैप्टन विरितो फर्नांडीस
  12. मुहम्मद हमीदुल्ला सईद
  13. काली चरण मुंडा
  14. जिया उर्र रहमान
  15. कल्याण बनर्जी
  16. ए. राजा
  17. लवु श्री कृष्ण देवरायालु
  18. नरेश गणपत म्हस्के
  19. कौशलेंद्र कुमार
  20. सुप्रिया सुले
  21. ई. टी. मुहम्मद बशीर

राज्य सभा से इन सांसदों को मिली जगह-

  1. सी. सदानंद मास्टर
  2. हर्षवर्धन श्रृंगला
  3. उज्जवल देवराव निकम
  4. अलका गुर्जर
  5. सत पॉल शर्मा
  6. प्रफुल्ल पटेल
  7. संजय कुमार झा
  8. क्रिस्टोफर मणिकम
  9. मेनका गुरुस्वामी
  10. पी . विल्सन

FCRA संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति में क्यों भेजा?

मॉनसून सत्र के दौरान सरकार इस बिल के पास करवाने के लिए लेकर आई थी। लेकिन विपक्ष के विरोध के बाद इसे संसदीय समिति के पास भेज दिया गया। विपक्ष का तर्क है कि इस मुद्दे पर एक व्यापक बहस की जरूरत है। ऐसे में इसे ऐसे ही पास नहीं किया जा सकता है। प्रस्तावित विधेयक में विदेशी अंशदान लेने वाले संगठनों के पंजीकरण और विदेशी धन से बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े कई नियमों में बदलाव की बात कही गई थी। विधेयक के सामने आने के बाद विपक्ष ने इस पर जमकर बवाल किया था। इतना ही नहीं संसद के बाहर भी कई अल्पसंख्यक समुदायों ने भी इस पर अपना विरोध दर्ज करवाया था।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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