संसद के मानसून सत्र का एजेंडा जारी, क्या आएगा महिला आरक्षण और परिसीमन बिल?
केंद्र की मोदी सरकार ने संसद के मानसून सत्र के लिए अपना विधायी एजेंडा जारी कर दिया है। सात प्रमुख विधेयकों को सूचीबद्ध करते हुए सरकार ने मजबूत लेजिस्लेटिव एजेंडा पेश किया है, लेकिन दो सबसे चर्चित और अहम संवैधानिक संशोधन बिल महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन अभी तक एजेंडे से बाहर हैं।

केंद्र की मोदी सरकार ने 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के लिए अपना विधायी एजेंडा जारी कर दिया है। इस सत्र में कुल सात महत्वपूर्ण विधेयकों को विचार के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें कुछ संशोधन विधेयक और नए प्रस्तावित कानून शामिल हैं। हालांकि, विपक्ष और राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल को अभी तक एजेंडा में जगह नहीं दी गई है, जिससे इनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस बार का मानसून सत्र काफी व्यस्त रहने वाला है। सरकार ने सत्र के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा और कानून बनाने की तैयारी की है, लेकिन अभी जारी किया गया तात्कालिक कार्यक्रम अधूरा माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि सत्र आगे बढ़ने के साथ-साथ और भी विधेयक पेश किए जा सकते हैं, क्योंकि अंतिम शेड्यूल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है।
विशेष रूप से महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन बिल पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि इन्हें कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है या नहीं। इन दोनों विधेयकों को राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा काफी महत्व दिया जा रहा है। इसी तरह, 130वां संवैधानिक संशोधन विधेयक (जिसमें प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को हटाने की प्रक्रिया से संबंधित प्रावधान हैं) को भी लोकसभा या राज्यसभा के मौजूदा एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, इस बिल पर जॉइंट संसदीय समिति (JPC) शुक्रवार को अपनी अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी देने वाली है, जिसके बाद इसे सत्र के दौरान संसद में पेश किया जा सकता है।
सत्र में विचार और पारित किए जाने वाले प्रमुख विधेयक
- विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026: मार्च 2026 में लोकसभा में पेश किया गया यह विधेयक गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) पर निगरानी को और सख्त बनाने का प्रयास है। विधेयक में प्रस्ताव है कि यदि किसी संगठन का FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है, समर्पित कर दिया जाता है या बिना नवीनीकरण के समाप्त हो जाता है, तो उसका विदेशी योगदान और संबंधित संपत्तियां सरकार द्वारा अधिसूचित 'डिजाइनेटेड अथॉरिटी' को हस्तांतरित कर दी जाएंगी। इससे विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी।
- विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: पहले से जॉइंट संसदीय समिति को भेजा गया यह विधेयक JPC की रिपोर्ट आने के बाद संसद में विचार के लिए आएगा। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) की जगह एक एकल, सरल और शक्तिशाली नियामक संस्था का गठन करना है, जिससे उच्च शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार हो सकें और बहु-नियामक व्यवस्था की जटिलता समाप्त हो।
सत्र में पेश किए जाने वाले पांच नए विधेयक
- आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026: एक अध्यादेश की जगह लेने वाला यह बिल भारत के सॉवरेन डेट मार्केट को गहरा बनाने और स्थिर लंबी अवधि के विदेशी निवेश को आकर्षित करने पर केंद्रित है। इससे आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
- सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026: इस महत्वपूर्ण विधेयक के तहत सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है। बढ़ते मुकदमों के बोझ को देखते हुए यह कदम न्याय प्रक्रिया को तेज करने में सहायक सिद्ध होगा।
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026: प्रशासनिक रिकॉर्ड को मजबूत करने वाला यह बिल जन्म और मृत्यु पंजीकरण में देरी करने वालों पर सख्त अनुपालन उपाय और भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान करता है। इससे सरकारी डेटाबेस की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026: 1971 के मौजूदा कानून में संशोधन करते हुए यह विधेयक राष्ट्रीय झंडे, राष्ट्रगान और अन्य राष्ट्रीय सम्मानों की गरिमा की रक्षा के लिए सख्त प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्था लागू करेगा।
- MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया जा रहा यह बिल भुगतान में देरी को रोकने के लिए मजबूत तंत्र तैयार करेगा। साथ ही, राज्य सरकारों को MSME सुविधा परिषद बनाने में अधिक लचीलापन प्रदान करेगा, जिससे व्यवसाय करने में आसानी होगी।


