
लंबे विरोध के बाद केंद्र सरकार का यू-टर्न, पंजाब यूनिवर्सिटी में चुनाव की तारीखें मंजूर
यह फैसला इसलिए बेहद अहम है क्योंकि केंद्र सरकार पहले सीनेट का आकार घटाकर चुनाव प्रक्रिया को लगभग खत्म करना चाहती थी, लेकिन भारी विरोध के बाद केंद्र को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।
चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) में कई हफ्तों से चल रहे विरोध के बाद अब विश्विद्यालय में सीनेट चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। यूनिवर्सिटी के चांसलर और देश के उपराष्ट्रपति ने भारी गतिरोध के बाद सीनेट चुनाव की तारीखों को मंजूरी दे दी है। अब सीनेट के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव 9 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 के बीच आयोजित होंगे। यह फैसला इसलिए बेहद अहम है क्योंकि छात्रों ने आरोप लगाए थे कि केंद्र सरकार पहले सीनेट का आकार घटाकर चुनाव प्रक्रिया को लगभग खत्म करना चाहती थी। हालांकि भारी विरोध के बाद केंद्र को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। इस मुद्दे को सिर्फ यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता ही नहीं बल्कि पंजाब के अधिकारों के लिए भी चुनौती माना जा रहा था।
चुनाव और नतीजे की तारीख आई सामने
बता दें कि सीनेट में कुल 91 सदस्य होते हैं और इनमें 49 सीटों पर चुनाव होने हैं। पिछली सीनेट का कार्यकाल अक्टूबर 2024 में खत्म हो चुका है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया है कि उनके द्वारा भेजा गया पूरा शेड्यूल मंजूर कर दिया गया है। इसके मुताबिक 7 सितंबर 2026 को प्रोफेशनल और टेक्निकल कॉलेजों के प्रिंसिपल और स्टाफ के चुनाव होंगे। इनके नतीजे 9 सितंबर को आएंगे। इसके बाद 14 सितंबर को यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के चुनाव होंगे और इसके नतीजे 16 सितंबर को आयेंगे। वहीं 20 सितंबर को अफिलिएटेड आर्ट्स कॉलेजों के प्रिंसिपल, फैकल्टी और रजिस्टर्ड ग्रेजुएट्स के चुनाव होंगे और इनके नतीजे 22 सितंबर को आएंगे। इसके बाद 4 अक्टूबर को पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के फैकल्टी मेंबरों का चुनाव होगा और नतीजे भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे।
पुरजोर विरोध के बाद केंद्र का यूटर्न
इससे पहले केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर 2025 को एक बड़ा बदलाव करते हुए सीनेट की संख्या कम करते हुए ग्रेजुएट्स कांस्टीट्यूएंसी की सीट खत्म कर दी थी। यह चुनाव क्षेत्र PU के पुराने छात्रों में से 15 सदस्यों को चुनता है, जिसके लिए पंजाब, चंडीगढ़ और कुछ पड़ोसी राज्यों में चुनाव होते हैं। सरकार के इस कदम का बड़ा राजनीतिक विरोध हुआ। सरकार ने इसे पंजाब की स्वायत्तता और अधिकारों पर हमला बताया। वहीं छात्रों के साथ किसान यूनियन, सिविल सोसाइटी और मुख्यमंत्री भगवंत मान भी विरोध में उतरे। दबाव बढ़ने पर केंद्र सरकार को 7 नवंबर को नोटिफिकेशन वापस लेना पड़ा। फिलहाल विरोध करने वाले छात्र संगठनों ने कहा है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा। उनकी मांगों में छात्रों के खिलाफ दर्ज पुलिस केस वापस लेना भी शामिल है।





