पानी को तरसेगा पाकिस्तान, भारत बनाएगा 2 बड़ी सुरंग; 2600 करोड़ होंगे खर्च
भारत के पानी के अधिकार वाली तीनों नदियों के देश में पानी के उपयोग की ढांचा पहले से ही तैयार है । दूसरी तरफ पाकिस्तान को ज्यादा पानी देने वाली तीनों नदियों पर समझौते के चलते कई काम रुके पड़े थे।

पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के साल भर बाद भारत ने पाकिस्तान को जाने वाले अधिकतम पानी को रोकने के लिए दो बड़ी टनल परियोजनाओं की तैयारी कर ली है। दोनों परियोजनाएं लंबी अवधि वाली हैं और उनके पूरा होने में काफी समय लगेगा, लेकिन इनके पूरा होने पर पाकिस्तान को जाने वाला अधिकतम पानी को हमेशा के लिए भारत रोक सकेगा। इससे इस पानी के गंगा बेसिन में पहुंचने का रास्ता भी बन जाएगा।
सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु बेसिन की छह नदियों में तीन संधु, चिनाब और झेलम के पानी के अस्सी फीसद का अधिकार पाकिस्तान व ब्यास,रावी, सतलुज के अस्सी फीसदी पानी पर भारत का अधिकार था, लेकिन भारत ने पहलगाम के आतंकी हमले के बाद इसे स्थगित कर हालात बदल दिए हैं।
भारत के पानी के अधिकार वाली तीनों नदियों के देश में पानी के उपयोग की ढांचा पहले से ही तैयार है । दूसरी तरफ पाकिस्तान को ज्यादा पानी देने वाली तीनों नदियों पर समझौते के चलते कई काम रुके पड़े थे। अब बीते एक साल से इन तीनों नदियों के पानी के भारत में अधिकतम इस्तेमाल पर काम हो रहा है, लेकिन पानी को रोकना इतना आसान काम भी नहीं है।
पानी रोकने व छोड़ने के समय को प्रभावित तो किया जा सकता है, लेकिन हमेशा के लिए अधिकतम पानी के लिए ढांचा तैयार करने में समय लगेगा। चेनाब के पानी को ब्यास में लाने व सलाल बांध की गाद निकालने के लिए नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन की इन दोनों परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 2600 करोड़ रुपये है।
दूसरी परियोजना में 268 करोड़ रुपये खर्च होंगे
दूसरी परियोजना में रियासी जिले में स्थित सलाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना पर लगभग 268 करोड़ रुपये खर्च आएगा। यहां एक नया डायवर्जन-कम-सेडिमेंट बाईपास टनल बनाया जाएगी। पहाड़ों से बहकर आने वाली मिट्टी के कारण सलाल में गाद जमा हो चुकी है। इससे जल भंडारण क्षमता घटकर पांच फीसद रह गई है।
8.7 किलोमीटर लंबी टनल बनाई जाएगी
2352 करोड़ रुपये की चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना के तहत लगभग 8.7 किलोमीटर लंबी एक टनल बनाई जाएगी। पहले चरण में लाहौल घाटी में नदी पर एक 19 मीटर ऊंचा बराज बनाया जाएगा। इससे चंद्रा नदी के पानी को हाइड्रोलिक स्ट्रक्चर और टनल की मदद से ब्यास बेसिन की तरफ मोड़ा जाएगा।
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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