भारत हमला करने वाला है, जुटा ली सेना; जब 75 साल पहले पाकिस्तान ने रचा था ढोंग
पाकिस्तान हमेशा से झूठे नैरेटिव गढ़ने के लिए मनगढ़ंत कहानियों का सहारा लेता आया है। ये किस्सा है 1951 का जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली ने भी ऐसा ही झूठ पूरी दुनिया के सामने कहा था।

पाकिस्तान और झूठ का नाता नया नहीं है। अपनी काली करतूतों को छिपाने और झूठे नैरेटिव गढ़ने के लिए पाकिस्तान हमेशा से ही नापाक तरीके अपनाता आया है। ऐसा ही एक किस्सा है 1951 का। जुलाई 1951 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली ने दुनिया भर में हौआ बना दिया कि भारत पाकिस्तान पर आक्रमण करने की तैयारियां कर रहा है।
लियाकत अली ब्रिटेन, अमरीका सहित कई देशों के पास गए और कहा कि भारत पाकिस्तान पर हमला करने वाला है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का भी दरवाजा खटखटाया। लियाकत ने पूरी दुनिया से कहा कि भारत ने जम्मू कश्मीर और पंजाब में पाकिस्तान की सीमा के पास अपनी सेना का 90 फीसदी हिस्सा जमा कर दिया है और इस तरह पाकिस्तान की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय शांति को बड़ा खतरा है।
भारत को देने लगे उपदेश
यही नहीं, लियाकत अली भारत को भी उपदेश देने लगे। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री को एक तार भेजा और दोनों देशों के रिश्तों की बात करते हुए हमला टालने की अपील की। उनकी यह अपील हास्यास्पद थी। तार को पढ़कर ऐसा लग रहा था मानो लियाकत अली को भारतीय सेना की गतिविधियों का पूरा-पूरा पता है। शायद इसलिए उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा था कि अब भारतीय सेना के सिर्फ तीन ब्रिगेड देश के भीतरी भाग में रह गए हैं और बाकी सारी सेना पाकिस्तान-भारत सीमा पर तैनात कर दी गई है।
अब सवाल यह है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली ने दुनिया के सामने जो हौवा बनाया उसका असली उद्देश्य क्या हो सकता है? दरअसल भारत की नीति हमेशा से ही शांतिप्रिय रही है। उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के साथ मित्रतापूर्ण और अच्छे संबंध बनाए रखने की भरसक कोशिश की। देश में एक ऐसा वर्ग था, जो नेहरू पर पाकिस्तान के प्रति तुष्टिकरण की नीति अपनाने का आरोप लगाता था। लेकिन नेहरू ने इस किस्म की विरोधी आलोचनाओं की परवाह न करते हुए भारत और पाकिस्तान के संबंधों को सुधारने की पूरी कोशिश की। वह नेहरू ही थे, जिन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सामने युद्ध-निषेधक घोषणापत्र प्रकाशित करने का प्रस्ताव पेश किया था।
नेहरू यह चाहते थे कि भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस बात की संयुक्त रूप से घोषणा करें कि दोनों देश किसी भी स्थिति में युद्ध का सहारा नहीं लेंगे और अपने सभी आपसी झगड़ों और मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीकों से निपटाएंगे। हालांकि तब लियाकत अली इस तरह की घोषणा के लिए तैयार नहीं हुए और फिर भारत पर ही उल्टे आरोप लगाने लगे।
प्रिंट इनपुट के सहयोग से
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Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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