भारत के खिलाफ इस देश से हेल्प मांग रहा पाकिस्तान, सिंधु जल के नाम पर नई चालबाजी
सिंधु जल समझौता को लेकर अब पाकिस्तान ने कनाडा का रुख किया है। हाल ही में इस्लामाबाद में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान ने कनाडाई मंत्री के सामने यह मांग रख दी। हालांकि, इसपर कनाडा की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने सोमवार को सिंधु जल संधि समझौते को बहाल करने के लिए कनाडा से मदद मांगी है। उन्होंने दो दिन की पाकिस्तान यात्रा पर पहुंचीं कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ यहां एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यह मदद मांगी।
सोमवार को डार ने दावा किया कि अप्रैल 2025 में संधि को स्थगित करने की घोषणा करके भारत ने 'पहले से ही अस्थिर सुरक्षा स्थिति में एक नया पहलू जोड़ दिया है'।
डार ने कहा, 'हम कनाडा समेत अपने मित्र देशों से समर्थन चाहते हैं ताकि भारत के साथ सिंधु जल संधि को तुरंत बहाल किया जा सके, पानी के हथियार के तौर पर इस्तेमाल को खत्म किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय कानून व परंपराओं के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कानून एवं संधि की शर्तों का पालन किया जा सके।'
क्या है समझौता
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुआ एक समझौता है। यह सिंधु घाटी की छह नदियों के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करता है, जिसके तहत पूर्वी नदियां भारत को और पश्चिमी नदियां मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित की गई हैं।
विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि के तहत पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज पर भारत का अधिकार है, जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का नियंत्रण पाकिस्तान के पास है।
भारत और पाकिस्तान ने सीमा पार बहने वाली नदियों के प्रबंधन के एकमात्र उद्देश्य से नौ वर्षों तक चली बातचीत के बाद 19 सितंबर, 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे।
भारत का रुख
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद इस संधि को निलंबित कर दिया था। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। भारत ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह संधि निलंबित रहेगी।
संधि पर बदलेगी स्थिति
पीटीआई भाषा की रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सिंधु जल संधि अपने मौजूदा स्वरूप में फिर से काम नहीं करेगी। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद खत्म करने के कोई संकेत नहीं दिए हैं, जबकि 65 साल से अधिक पुरानी इस संधि के तहत सहयोग फिर से शुरू करने के लिए यह एक जरूरी शर्त है।
सूत्रों ने कहा कि भविष्य में नदी जल बंटवारे से जुड़े प्रावधानों को फिर से लागू करने के लिए संधि में संशोधन के साथ नए सिरे से बातचीत करनी होगी। हालांकि, यह कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देना स्थायी रूप से बंद करे।ॉ
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान यह झूठा विमर्श फैलाने की कोशिश कर रहा है कि भारत द्वारा संधि को स्थगित रखने के फैसले के कारण जल संकट पैदा हो रहा है। वास्तव में, पाकिस्तान को मिलने वाले पानी की बड़ी मात्रा उसके अपने भंडारण ढांचे की कमी, बड़े पैमाने पर रिसाव और उसके प्रांतों के बीच जारी जल बंटवारे के विवादों के कारण बर्बाद हो जाती है।
लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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