मध्यस्थ नहीं, खुद बड़ा मर्ज है पाकिस्तान; मदद की स्थिति में तो PM मोदी हैं: पूर्व अमेरिकी कर्नल की दो टूक

Pramod Praveen एएनआई, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

रिटायर्ड कर्नल डगलस मैकग्रेगर एक अमेरिकी सेना के अनुभवी अधिकारी, लेखक और रक्षा सलाहकार हैं, जो अपनी विवादास्पद विदेश नीति, सैन्य रणनीतियों और भू-राजनीतिक विश्लेषणों के लिए जाने जाते हैं।

मध्यस्थ नहीं, खुद बड़ा मर्ज है पाकिस्तान; मदद की स्थिति में तो PM मोदी हैं: पूर्व अमेरिकी कर्नल की दो टूक

रिटायर्ड अमेरिकी कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने एक बार फिर कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध में सीजफायर कराने के लिए मददगार भूमिका की स्थिति में हैं। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में डगलस मैकग्रेगर ने दो टूक कहा कि पाकिस्तान की पेशकश पर भरोसा करना मुश्किल है क्योंकि वह खुद एक बड़ा मर्ज है। पाकिस्तान की मध्यस्थता पेशकश पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद की पेशकश भरोसेमंद नहीं मानी जाएगी।

वैश्विक तनाव के बीच कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने पश्चिम एशिया संकट और उसके समाधान की दिशा में हो रहे कूटनीतिक प्रयासों को लेकर ये तीखे बयान दिए हैं। मैकग्रेगर ने कहा, “पाकिस्तान का मदद की पेशकश करना, ठीक वैसा ही है जैसे कोई व्यक्ति खुद जलती हुई इमारत में फंसा हो और आपको रहने के लिए कमरा देने की पेशकश करे।” उन्होंने आगे कहा, “इजरायली लोग पाकिस्तान को निष्पक्ष नजर से नहीं देखेंगे बल्कि वे पाकिस्तान को समस्या का ही एक हिस्सा मानेंगे।”

रूस-चीन से मिल रही ईरान को रणनीतिक मदद

पीएम मोदी की मजबूत वैश्विक स्थिति की बात करते हुए पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने दो टूक कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ही ऐसी स्थिति में हैं कि वे वास्तव में मदद, समर्थन और सहायता प्रदान कर सकते हैं।” उन्होंने कहा कि यहां तक ​​कि अमेरिका में भी, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को मुख्य रूप से इजरायली एजेंट के तौर पर देखा जाता है।” उन्होंने ईरान को मिल रहे रूसी और चीनी मदद के सवालों पर बड़ा दावा करते हुए कहा, “चीनी और रूसी उपग्रह ईरान को तस्वीरें (इमेजरी) उपलब्ध करा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल वे एक हज़ार मील तक मार करने वाली टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ कर रहे हैं।”

क्यों अहम है यह बयान?

मैकग्रेगर के बयान ऐसे समय आए हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। कई देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं और वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है। बहरहाल, मैकग्रेगर के बयान भले ही व्यक्तिगत राय हों, लेकिन वे यह संकेत जरूर देते हैं कि मध्यस्थता की राजनीति अब केवल कूटनीति नहीं, बल्कि भरोसे और वैश्विक छवि की लड़ाई भी बन चुकी है।

पहले भी पीएम मोदी की भूमिका का कर चुके हैं जिक्र

कुछ दिनों पहले भी अमेरिकी राजनीतिक कार्यकर्ता और कमेंटेटर टकर कार्लसन को दिए इंटरव्यू में,मैकग्रेगर ने कहा था कि इज़रायल-ईरान युद्ध में अमेरिका की लगातार दखलंदाज़ी के गंभीर आर्थिक नतीजे होंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि अमेरिका को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा कोई मध्यस्थ ढूंढना चाहिए। उन्होंने तब कहा था कि पीएम मोदी के न केवल इज़रायल के साथ अच्छे संबंध हैं; बल्कि ईरान के साथ भी उनके अच्छे संबंध हैं। इसके अलावा रूस और चीन के साथ भी ठीक-ठाक संबंध हैं। यही वजह है कि वह ईरान युद्ध को रोक पाने में एक मददगार की भूमिका निभा सकते हैं।

कौन हैं डगलस मैकग्रेगर?

बता दें कि रिटायर्ड कर्नल डगलस मैकग्रेगर एक अमेरिकी सेना के अनुभवी अधिकारी, लेखक और रक्षा सलाहकार हैं, जो अपनी विवादास्पद विदेश नीति, सैन्य रणनीतियों और भू-राजनीतिक विश्लेषणों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 1991 के खाड़ी युद्ध में भी भाग लिया था और बाद में अमेरिकी रक्षा मंत्री के सलाहकार के रूप में भी काम किया है। वे अक्सर रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व संघर्षों पर अपनी राय के लिए चर्चा में रहते हैं। मैकग्रेगर ने 1999 के कोसोवो हवाई अभियान की योजना बनाने में मदद की थी।

कृपया अपने अनुभव को रेट करें

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

और पढ़ें