ईरान युद्ध के बीच बाजी मार गया पाकिस्तान? भारत पर कितना पड़ेगा इसका प्रभाव

Apr 10, 2026 02:50 pm ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
share

ईरान- अमेरिका और इजरायल के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को हाइलाइट करने का प्रयास किया है। हालांकि जानकारों का कहना है कि इससे भारत की कूटनीति को कोई झटका नहीं लगा है। 

ईरान युद्ध के बीच बाजी मार गया पाकिस्तान? भारत पर कितना पड़ेगा इसका प्रभाव

अमेरिका और ईरान का युद्ध शुरू होने के बाद से ही पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय प्लैटफॉर्म पर खुद को हाइलाइट करने में जुट गया। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने का प्रस्ताव पेश कर दिया। वहीं अन्य कई मुस्लि देश जैसे कि तुर्की, एजिप्ट और सऊदी अरब भी उसेक साथ हो लिए। अब सवाल है कि क्या पाकिस्तान ईरान और अमेरिकी का मध्यस्थता करने के बहाने एक नया संगठन बनाने की कोशिश कर रहा है और इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को उच्च-स्तरीय वार्ता की मेजबानी करने जा रहे पाकिस्तान ने राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। हालांकि, शीर्ष ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर किए गए इजराइली हमले वार्ता को निरर्थक बना सकते हैं। अमेरिका और ईरान बुधवार को दो हफ्ते के लिए सशर्त युद्ध-विराम पर सहमत हो गए। इसके बाद, मतभेदों को सुलझाने और मौजूदा युद्ध-विराम को एक स्थायी शांति में तब्दील करने के लिए इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बैठक होनी है।

भारत का क्या है रुख

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि युद्धविराम का फैसला स्वागत योग्य है। साथ ही उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की स्थापना में मदद मिलेगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जंग पहले ही बहुत नुकसान कर चुकी है। इससे वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई है और अर्थव्यवस्था को ब ड़ा नुकसान पहुंचा है। उम्मीद है कि अब कमर्शनल और तेल के जहाज होर्मुज से होकर गुजर पाएंगे।

ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने की पाक की तारीफ

यूरोपीय संघ और बिर्टेन समेत दुनिया के कई देशों ने पाकिस्तान को मध्यस्थता का क्रेडिट देते हुए तारीफ की है। वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता पर कोई बयान नहीं दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी युद्धविराम की घोषणा करते वक्त पाकिस्तान का नाम लिया था।

क्या कह रहा है विपक्ष

विपक्ष का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मामले में पाकिस्तान सफल हो रहा है और यह भारत के लिए झटका है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान ने जिस तरह से ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर डील में भूमिका निभा दी है उससे पीएम मोदी की अपनी स्टाइल की डिप्लोमेसी को झटका लग सकता है। कांग्रेस नेता राशिद अलवी ने कहा कि भारत को भी वही करना चाहिए था जो कि पाकिस्तान ने किया है।

पाकिस्तान की क्या है स्थिति

कई जानकारों का कहना है कि अमेरिका ईरान से युद्ध में पस्त होने लगा था और इसलिए वह किसी भी तरह युद्धविराम चाहता था। हालांकि यह भी दिखाना था कि किसी तीसरे के प्रयास से युद्धविराम हो। ऐसे में उसने पाकिस्तान को मोहरा बनाया। इसके अलावा मध्यस्थता के दावे के बाद बातचीत अभी शुरू होने वाली है। ऐसे में देखना यह भी होगा कि इसका अंतिम परिणाम क्या निकलेगा।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही पाकिस्तान किसी तरह अपना आसरा ढूंढ रहा है। ऐसे में उसने डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तारीफ शुरू की और फिर करीबी बनाई। एक तरफ पाकिस्तान अमेरिका की सरपरस्ती चाहता है तो दूसरी ओर अमेरिका उसके इस्तेमाल से चूकेगा नहीं है। अमेरिका की नजर पाकिस्तान के रेयर अर्थ मिनरल्स पर भी है।

क्या भारत को लगा है झटका

पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए बड़ा कदम उठाया था और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कई देशों में भेजा था। जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मामले में पाकिस्तान को वरीयता मिलना भारत के लिए अभी झटका जरूर है। '

रूस और अमेरिका के बीच भी मध्यस्थता कर चुका है पाक

पाकिस्तान 1970 में शीतयुद्ध के दौरान पाकिस्तान और रूस के बीच मध्यस्थता कर चुका है। उस समय भी इस तरह की चिंता जाहिर की गई थी। हालांकि भारत की कूटनीति मजबूत स्थिति में आज भी है। पाकिस्तान का पड़ोसी अफगानिस्तान भी उससे बात करने को तैयार नहीं है और तालिबान भारत से अच्छे संबंध बनाकर रखना चाहता है। जानकारों का कहना है कि भारत ने हर स्थिति में युद्ध को गलत ही बताया है और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि ने ईरानी दूतावास में जाकर ईरान की शोक पुस्तिका पर साइन भी किए थे। होर्मुज बंद होने के बाद भी भारत के पोत सुरक्षित गुजरते रहे, यह भी भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

और पढ़ें